प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह कौशाम्बी में भी भूकंप झटके पर झटका दे रहा है। रविवार दोपहर दूसरे दिन भी भूकंप के झटके लगे। बार-बार झटके लगने से लोगों में किसी बड़ी अनहोनी का खौफ भर गया है। तभी तो रविवार को धरती कांपते ही लोग घरों से एक बार भाग निकले तो दुबारा मकानों, दुकानों में दाखिल होने में उन्हें डर लग रहा था। मंझनपुर के आसपास के कई गांवों में तो लोग डरवश दिन भर पेड़ों की छांव में ही बैठे रहे।
काठमांडू में आए भीषण भूकंप से शनिवार दोपहर दो बार कौशाम्बी में भी झटके लगे थे। उस झटके के बाद दिन और रात सकुशल पार हो जाने पर कौशाम्बी के लोग बेफिक्र हो गए थे। उन्हें भरोसा हो गया था कि अब जल्द भूकंप के झटके नहीं आएंगे। उनकी सोच भी सही थी, क्योंकि एक बार झटके लगने के बाद अमूमन देखा गया है कि दो-तीन साल बाद ही भूकंप के फिर से झटके लगते हैं। पर, इस बार ऐसा नहीं हुआ। 24 घंटे के भीतर रविवार दोपहर फिर से भूकंप का झटका आया, तो लोग दहल गए। खौफ से भरे लोग घरों, दुकानों से निकल भागे। जान बचाकर घर से भागे लोगों में ऐसा डर भर गया था कि लोग जल्द घर में घुसने का साहस ही नहीं दिखा पा रहे थे।
मंझनपुर के ही आसपास घना का पुरा, समदा, ओसा, टेन शाह आलमाबाद, इचौली, छोगरियन का पुरा, पाता, बबुरा, मडूकी, कोर्रों, मगरोहनी, सेहिया, तन्नापर, भड़ेसर, बरईन का पुरा, अंबावा, कादिराबाद, फरीदपुर आदि गांवों में तो महिलाओं ने को पेड़ों की छांव में बैठकर खौफ में दिन गुजार दिया। चक पिनहा गांव के राधेश्याम, तिल्हापुर (नेवादा) गांव के गुड्डू और मंझनपुर के संतोष कुमार का कहना है कि लगातार दो-दो दिन तक भूकंप के झटके लगे हैं। इससे प्रत्येक व्यक्ति किसी बड़ी आपदा के संकेत से सहमा हुआ है। नेतानगर मंझनपुर की रहने वाली गुंजा केसरवानी, रूबी और मालती देवी आदि ने बताया कि भूकंप के बार-बार आ रहे झटकों से मन के भीतर डर समा गया है। अब तो घर के भीतर यदि कहीं भी कुछ खटपट होता है तो लगता है जान गई।