स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के मॉडल गांवों में खरीदी गई कूड़ा ई-रिक्शा गाड़ियों की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। जिले के सैकड़ों गांवों में गाड़ियां या तो गायब हैं या फिर उनका कोई अता-पता नहीं है।
कई ग्राम पंचायतों में कूड़ा गाड़ी खरीद के लिए प्राक्कलन तैयार कर भुगतान तक कर दिया गया, लेकिन गांवों में आज तक व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है और योजना में भ्रष्टाचार के आरोप भी उठने लगे हैं।
गांवों को साफ-सुथरा रखने और घर-घर से कूड़ा उठान व्यवस्था शुरू करने के लिए पंचायतों में लाखों रुपये खर्च किए गए थे। प्रस्ताव पास हुए, प्राक्कलन तैयार किए गए और फाइलों में योजना पूरी भी दर्शा दी गई, लेकिन अधिकांश गांवों में हालात जस के तस बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आज भी कूड़ा सड़क किनारे, नालियों और खाली पड़ी जमीनों पर फेंका जा रहा है। कई जगहों पर कूड़ा गाड़ी खरीदी तो गई लेकिन रखरखाव के अभाव में जल्द खराब हो गई। कुछ गांवों में गाड़ियां केवल प्रधान के घर तक सीमित बताई जा रही हैं।
मूरतगंज क्षेत्र के काजीपुर निवासी शिवबरन और सैयद सरांवा के सुधीर कुमार ने बताया कि प्रधानों ने गांव में कूड़ा गाड़ी आने की बात कही थी लेकिन आज तक गाड़ी दिखाई नहीं दी।
नेवादा ब्लॉक के बिरनेर गांव की रामदेई देवी ने कहा कि गांव में कोई कूड़ा उठाने नहीं आता जबकि गाड़ी खरीदने की चर्चा जरूर हुई थी। सिराथू क्षेत्र के कूरा मुरीदन निवासी राज कुमार ने बताया कि पंचायत में लाखों खर्च होने की बात सुनने को मिली लेकिन गांव की सफाई व्यवस्था पहले जैसी ही बनी हुई है।
मंझनपुर ब्लॉक के भैला मकदूमपुर निवासी रमेश चंद्र ने बताया कि दो साल पहले गांव में कूड़ा गाड़ी आई थी लेकिन उसका उपयोग कहां हो रहा है, यह किसी को नहीं पता। वहीं चायल ब्लॉक के फतेहपुर सहावपुर निवासी मदन सरोज ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान दूसरी पंचायत से गाड़ी लाकर दिखा दी जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सत्यापन के भुगतान कर दिया गया और निगरानी के अभाव में योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब लोग पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत खरीदी गई कूड़ा ई-रिक्शा गाड़ियों की जांच कराई जाएगी। जहां गाड़ियां नहीं मिलीं या संचालन प्रभावित पाया गया, वहां संबंधित ग्राम पंचायतों और अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।