मंझनपुर। जिले में सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को कागज पर उठाया जा रहा है। जिस फर्म को मेडिकल कचरा उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह कभी अस्पतालों में झांकने तक नहीं जाती। मेडिकल कचरे बिखरा पड़ा होने से हर समय संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा मंडराता रहता है। विभागीय अफसर सबकुछ जानने के बाद भी बेखबर हैैैं।
जिला अस्पताल और 13 प्राथमिक व सामुदायिक केंद्र हैं। इसके अलावा 29 न्यू पीएचसी व 174 सब सेंटर हैं। इसके अतिरिक्त 100 के करीब निजी अस्पतालों का पंजीकरण किया गया है। इन अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को उठाने की जिम्मेदारी प्रयागराज की एक फर्म को सौंपी गई है। नियम के मुताबिक फर्म की गाड़ी को रोजाना हर अस्पताल आकर कचरे को एकत्र कर उसका निस्तारण करना है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए स्वास्थ्य महकमे से करीब 17 लाख सालाना का बजट निर्धारित किया गया है।
इसके बाद भी संस्था का वाहन कचरा उठाने नहीं आता है। नतीजतन अस्पतालों से निकलने वाला कचरा परिसर में ही फैला रहता है। ऐसे में गंदगी की वजह से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा तो बना ही रहता है, साथ ही कचरा निस्तारण न होने से मरीजों में संक्रमण फैलने का भी भय रहता है।