दोआबा में वाहनों पर सफर करने वाले लोगों के जिंदगी की स्टेरिंग नाबालिगों के हाथ में है। अनुभव विहीन इन चालकों ने दलालों के हाथों धन खर्च कर परिवहन विभाग का लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। ऐसे में दोआबा में चल रहे विक्रम, अप्पे, टैंपो और मिनी बसों में सफर करने वाले लोगों की जान जोखिम में रहती है। जब तक वह घर नहीं पहुंच जाते खुद को सुरक्षित नहीं समझते। इन पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार हैं कि वसूली के आगे सारे नियम कानून ताक पर रखे हुए हैं। नतीजा सड़कों पर आए दिन अप्पे, विक्रम और मिनी बस की टक्कर से लोग घायल होकर असमय मौत के मुंह में समा रहे हैं।
दोआबा में संभागीय परिवहन विभाग में दलालों का बोलबाला है। दलालों के दखल के चलते दोआबा के नाबालिग भी विक्रम, टैंपो, टैक्सी और मिनी बस चलाने का लाइसेंस प्राप्त कर ले रहे हैं। दलालों के माध्यम से पहुंच रही मोटी रकम के चलते परिवहन विभाग के जिम्मेदार भी धड़ल्ले से लाइसेंस जारी कर रहे हैं। विभाग से लाइसेंस मिलने के बाद अनुभव हीन नाबालिग ड्राइवर वाहनों को लेकर सड़क पर फर्राटा भरने लगते हैं। ऐसे में मजबूर दोआबा के लोगों को इन्हीं चालकों के वाहनों में बैठकर बाजार सहित अन्य गंतव्य तक पहुंचने का सफर तय करना पड़ता है। बगैर प्रशिक्षण के सड़क पर वाहनों को रफ्तार देने वाले यह चालक आए दिन पैदल, बाइक और साइकिल सवार को ठोंक देते हैं।
यही कारण है कि दोआबा में दुर्घटनाओं से मौत में लगातार इजाफा होता जा रहा है। जनवरी से अब तक के हुए हादसों पर नजर डालें तो दो दर्जन से अधिक लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं तो सैकड़ों की संख्या में घायल हुए लोगों को महीनों अस्पताल में रहना पड़ा। इसके बावजूद परिवहन विभाग के जिम्मेदार अवयस्कों को लाइसेंस जारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
लाइसेंस होने के चलते यातायात पुलिस नहीं कर पाती चालान
सड़कों पर नियम कानून का उल्लंघन करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस तैनात है। प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह द्वारा आए दिन चेकिंग लगाकर नाबालिगों के फर्राटा भरने पर अंकुश भी लगाया जाता है लेकिन विक्रम, टैक्सी, अप्पे चालकों के पास लाइसेंस होने की वजह से वह चालक के नाबालिग होना जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वह भी हाथ मलकर रह जा रहे हैं।
दो हजार रुपये लेकर देते हैं सर्टिफिकेट
दोआबा में मोटर ट्रेनिंग सेंटर का प्रमाण पत्र लगने के बाद ही परिवहन विभाग वाहन चलाने का लाइसेंस जारी करता है लेकिन इसमें बड़ा खेल है। किसी भी लाइसेंस बनवाने वाले को ट्रेनिंग स्कूल के जिम्मेदारों द्वारा प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। जैसे ही लाइसेंस के लिए किसी ने आवेदन किया तो कार्यालय के बाहर मौजूद मोटर ट्रेनिंग स्कूल का संचालक बगैर किसी प्रशिक्षण के दो हजार रुपये लेकर प्रमाण-पत्र जारी कर देता है। प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र लगे होने के बाद एआरटीओ द्वारा संबंधित को लाइसेंस जारी कर दिया जाता है।
अनपढ़ की आड़ में बन रहा नाबालिगों का लाइसेंस
एआरटीओ कार्यालय में उम्र छिपाने के लिए नाबालिगों द्वारा अनपढ़ होना बता दिया जाता है। इसके बाद पचास से सौ रुपये का शपथपत्र देकर उम्र 18 साल से अधिक होना बता दिया जाता है। शपथ पत्र मिलने के बाद एआरटीओ द्वारा संबंधित के खिलाफ कोई छानबीन नहीं की जाती। उसे पूर्ण रूप से बालिग मानकर एआरटीओ द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। इस चूक का खामियाजा सड़कों पर चलने वाले बेगुनाह लोगों को भी अक्सर भुगतना पड़ता है।
लाइसेंस जारी करते समय सभी औपचारिकताओं पर पूरा ध्यान दिया जाता है। उम्र का प्रमाण पत्र देखने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। अब शिक्षा प्रमाण पत्र में गड़बड़ी हो तो इस बावत कुछ नहीं कहा जा सकता। रही बात प्रशिक्षण की तो इस बावत मोटर ट्रेनिंग स्कूल से सघन पूछताछ की जाएगी। बगैर प्रशिक्षण के ड्राइविंग कुशलता का प्रमाण पत्र जारी किए जाने की पुष्टि होने पर संबंद्धीकरण समाप्त कर दिया जाएगा।
केडी सिंह, एआरटीओ कौशाम्बी