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नशे के नाम पर पी रहे जहर

Mon, 11 Dec 2017 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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शराब - फोटो : demo pic
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गंगा-यमुना की तराई में बसे गांवों के मजदूर नशा के नाम पर जहर पी रहे हैं। स्प्रिट की दुकानों से सामान्य लोगों को मौत बेंची जा रही है। पैसे के अभाव में लोग बेखौफ होकर मौत को गले लगा रहे हैं। आबकारी विभाग के अफसरों की मेहरबानी से यह गोरखधंधा चल रहा है। शिकायत और जानकारी के बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं। इसका खामियाजा गरीब तबके के मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
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बौद्ध की तपस्थली इन दिनों मादक पदार्थ का गढ़ बन चुकी है। जिले में स्प्रिट की पांच दुकानें मंझनपुर, करारी, भरवारी, सिराथू और सरायअकिल में संचालित हैं। इन दुकानों से मेडिकल स्टोरों या फिर जरूरतमंदों को स्प्रिट बेंचने का प्राविधान है। मगर, दुकान संचालक ऐसा न करके नशेड़ियों को स्प्रिट बेंच रहे हैं। आबकारी विभाग की इस अनदेखी से तराई के लोग स्प्रिट पीने के शौकीन हो गए हैं। दिन ढलते ही दुकानों में पियक्क ड़ों का जमावड़ा लग जाता है। सबसे से ज्यादा स्प्रिट सरायअकिल की दुकान से बेंची जाती है। अफसरों की अनदेखी के चलते तराई के लोग नशे की जगह मौत को गले लगा रहे हैं।

पांच गुना पानी मिलाकर बेचते हैं कारोबारी
कारोबारी एक लीटर स्प्रिट में पांच लीटर पानी मिलाते हैं। इसके बाद उसे नशे के शौकीनों के हाथ बेखौफ होकर बेंचते हैं। दस रुपए की स्प्रिट खरीद कर पीने वाला पूरी तरह नशे में आ जाता है। उसको यह नहीं पता होता कि वह नशा नहीं बल्कि मौत का घूंट पी रहा है।
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