चायल। तालाब भरने के दौरान नहर का कटान बढ़ने से सेवढ़ा गांव में नहर का पानी घुस गया। गांव के दर्जनों मकान में पानी भर जाने से अफरा तफरी मच गई। खेत, खलिहान, सड़क जलमग्न हो गई। घंटों की मशक्कत के बाद शनिवार को गांववाले कटान बंद कर सके। उधर, मकानों में पानी घुसने से खाद्यान्न, बिस्तर, कपड़े समेत लाखों रुपये की गृहस्थी का सामान भीगकर बर्बाद हुआ है।
चायल तहसील क्षेत्र के सेवढ़ा गांव के समीप से रामगंगा माइनर निकली है। बताया जाता है कि शुक्रवार को माइनर में पानी छोड़ा गया था। माइनर में पानी आया देख गांव के मत्स्य पालक गुड्डा ने तालाब में पानी भरने के लिए माइनर काट दी थी। इधर, रात में यह कटान इतना अधिक हो गया। जिससे माइनर का सारा पानी इसी कटान से खेत, खलिहान, सड़क को जलमग्न करता हुआ सेवढ़ा गांव में घुस गया। रात करीब दो बजे माइनर का पानी गांव के बच्चूलाल, शिवमूरत, धर्मपाल, अलगू, शोभालाल, इंद्रपाल, बुधई, देशराज, भुलई, दिरगज आदि दर्जनों लोगों के घर में भरने लगा। इससे गांव में अफरातफरी मच गई। उधर, घर में अचानक पानी भर जाने से ग्रामीणों का आटा, चावल, गेहूं के साथ ही बिस्तर, कपड़े, जानवरों का भूसा, जलावनी लकड़ी, उपले आदि भीगकर बर्बाद हो गए हैं। भुक्तभोगियों के मुताबिक भीगने से सबसे ज्यादा नुकसान अनाज का हुआ है।
वहीं खेतों में घुटनों तक पानी भर जाने से आलू, मटर, चना, सरसों, गेहूं आदि की फसल भी सड़कर बर्बाद हो जाएगी। ग्रामीणों के मुताबिक इससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होगा। उधर, घरों में पानी घुसने से मची अफरातफरी के बीच गांववाले जुट गए। शनिवार की सुबह घंटों की मशक्कत के बाद ग्रामीण नहर के कटान को बांध सके। इसके बाद गांव की ओर पानी का जाना बंद हुआ। उधर, गांव को जाने वाली सड़क और गलियों में भी पानी भरा हुआ है। इससे दिनभर लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सेवढ़ा गांव में नहर का पानी 12 घंटे से भरा हुआ है। इससे सीलन के कारण गांववालों के कच्चे मकानों के गिरने का खतरा भी बना हुआ है। घर की दीवारों में सीलन भर जाने से ग्रामीण भयभीत भी हैं। बता दें कि गांव के जिन व्यक्तियों के मकानों में पानी घुसा है। अथवा जिन मकानों के आसपास पानी भरा हुआ है। ज्यादातर मकान कच्ची मिट्टी के ही बने हुए हैं। गांव के रहने वाले बच्चूलाल, दिरगज, बुधईलाल, इंद्रपाल आदि ने बताया कि गांव में भरा पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में यदि जल्द पानी सूखता नहीं है, तो ग्रामीणों के घरों के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं ग्रामीण भयभीत हैं कि सीलन के कारण कच्ची मिट्टी की दीवारें फटकर भी जमींदोज हो सकती हैं।