ठंड का मौसम शुरू होते ही कुत्ते आक्रामक होने लगे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेवादा में नवंबर के 10 दिन में कुल 25 लोग कुत्तों के शिकार हुए हैं। सभी को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया है।
अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, अमवा गांव के आठ साल के सिद्धांत और 10 वर्ष की कांति, मखऊपुर के चार वर्षीय अनुभव, इमलीगांव की 40 वर्षीय संगीता, चरवा के इसी उम्र के अजय समेत 25 लोग बीते 10 दिन में कुत्तों के शिकार हो चुके हैं।
पशुपालन विभाग के डाॅ. पीके सिंह ने बताया कि ठंड में मुख्य रूप से कुत्तों के आक्रामक होने की वजह उनका ब्रीडिंग सीजन (प्रजनन काल) है। उन्होंने बताया कि वर्ष में दो बार छह महीने फरवरी, मार्च, अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर कुत्तों का प्रजनन काल होता है।
उन्होंने बताया कि कुत्तों में टेस्टोस्टेरोन नामक उत्तेजना वाले हार्मोंस ज्यादा मात्रा में शरीर में बढ़ने से वे हिंसक हो जाते हैं। इसलिए इस मौसम में लोगों को कुत्तों से बचना चाहिए। पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. मनोज कुमार चौरसिया ने बताया कि कुत्तों के काटने पर सावधानी बरतनी चाहिए।
कुत्तों के काटने पर ये बरतें सावधानी
- घाव को साफ पानी और साबुन से पांच मिनट तक धोना चाहिए।
- एंटी रेबीज इंजेक्शन (एआरवी) की पहली डोज जल्द से जल्द 24 घंटों के भीतर लगवानी चाहिए।
- तीसरे, सातवें और 28वें दिन एआरवी की दूसरी, तीसरी और चौथी डोज लगवानी चाहिए।
- घाव ज्यादा होने पर तुरंत इम्युनोग्लोबिन लगवानी चाहिए।
- कुत्ते पर नजर रखें। वह मर जाता है तो इलाज में लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।