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दोआबा के एक और अन्नदाता की मौत

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चायल (कौशाम्बी)। मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों के गम में किसानों की मौत थम नहीं रही है। बृहस्पतिवार की रात भी सदमे में चायल तहसील के जनका गांव के किसान मोतीलाल (60) की सांसें थम गईं। उसने एक दिन पहले ही फसल की मड़ाई कराई थी। परिजनों के मुताबिक 5 बीघे में 6 कुंतल से भी कम अनाज निकला है। 10 फीसदी भी पैदावार नहीं होने से वह परेशान हो उठा था। रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।
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चायल तहसील क्षेत्र के जनका गांव निवासी मोतीलाल पटेल (60) किसान था। वह अपने 5 बेटों कमलेश, राकेश कुमार, सुनील, अनिल और दिलीप के साथ खेती ही करता है। इसी से उसके परिवार का सारा खर्च चलता था। उसके बड़े बेटे कमलेश कुमार ने बताया कि इस बार 5 बीघे में गेहूं की खेती की गई थी। फसल भी अच्छी थी। पर, मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ तीन बार हुई बारिश में गिरकर उसकी सारी फसल चौपट हो गई। रही सही कसर अप्रैल महीने में हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी कर दी। गिरकर बर्बाद हुई फसल भीगने से और बर्बाद हो गई।

इधर, मौसम साफ होने पर उसने किसी तरह फसल की कटाई करवाई। बृहस्पतिवार को मड़ाई कराई गई, तो 5 बीघा खेत की फसल में मुश्किल से 6 कुंतल गेंहू निकला है। जबकि कम से कम 50 कुंतल की उपज होनी चाहिए। इतनी कम पैदावार देखकर उसके पिता परेशान हो उठे। बताया कि मड़ाई के बाद से ही उसके पिता गुमसुम थे। बृहस्पतिवार की रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। सीने में तेज दर्द होने लगा। लोग कुछ समझ पाते। उन्हें इलाज के लिए लेकर जाते। इससे पहले ही उनकी सांसें थम गई। पत्नी, बेटों के अलावा गांववालों का भी मानना है कि फसल बर्बादी के सदमे में मोतीलाल की मौत हुई है।
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बर्बाद हुई फसल के सदमे में मृत किसान मोतीलाल ने बेटे ने बताया कि खेती की जीविका का साधन थी। पर, दो साल से मौसम की मार से फसलें तबाह हो रही थी। मृत किसान के बेटों की मानें तो पिछले साल भी फरवरी महीने में बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं, आलू समेत सभी फसलें बर्बाद हो गई थी। किसी तरह से घर के निवाले का इंतजाम हो पाया था। कम बारिश से धान की भी पैदावार प्रभावित हुई थी। ऐसे में रबी के सीजन में आलू, गेंहू आदि की बुआई के लिए उसके पिता ने एसबीआई की मनौरी शाखा से केसीसी योजना के तहत 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। अनुमान था कि अच्छी पैदावार होने पर बैंक का लोन अदा कर दिया जाएगा। पर, मौसम की मार से जुताई, सिंचाई और मड़ाई की रकम भी निकलनी मुश्किल है। बैंक का कर्ज कहां से दिया जाएगा? परिजनों का मानना है कि इन्हीं चिंताओं के कारण मोतीलाल अब इस दुनिया में नहीं है।


मौसम की मार से तबाह हुई फसल के गम में जनका गांव के जिस किसान मोतीलाल के घर उनकी मौत का मातम पसरा है। वहीं एक दिन पहले तक बेटे की शादी की चहल-पहल थी। बता दें कि मोतीलाल के दूसरे नंबर के बेटे राकेश की शादी 27 अप्रैल को हुई थी। 28 अप्रैल को बहू घर आई। जिस घर में 4 दिन पहले शादी की शहनाई बजी थी। वहीं अब घरवालों की सिसकियां सुनाई दे रही हैं। शादी वाले घर में अब मातम पसरा हुआ है।
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