दोआबा के मरीजों को अच्छा इलाज मुहैया कराने वाला एक मात्र संयुक्त जिला चिकित्सालय रविवार को खुद बीमार हो जाता है। सीएमएस के अस्पताल से हटते ही स्टॉफ नर्स और डॉक्टर गायब हो जाते हैं। इतना ही नहीं सफाई कर्मी तक अस्पताल नहीं आते हैं। इसका खामियाजा अस्पताल के मरीजों को भुगतना पड़ता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों, स्टॉफ नर्स और सफाई कर्मचारियों पर सीएमएस का कोई जोर नहीं रह गया है। इसके चलते अस्पताल में मरीजों को आए दिन अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ता है। रविवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा अस्पताल में नजर आया। अस्पताल में स्टॉफ नर्स रंजना यादव और सरोज गौतम की ड्यूटी थी। दो में से एक भी अस्पताल में मौजूद नहीं रहे। इसके चलते मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। यही हाल चिकित्सकों का रहा।
अस्पताल में किस चिकित्सक की ड्यूटी थी यह बताने वाला तक कोई नहीं था। इमरजेंसी में अकेले डॉ. सौभाग्य सिंह ऊंघ रहे थे। इतना ही नहीं रविवार होने की वजह से अस्पताल में एक भी सफाई कर्मी नहीं पहुंचा। इससे पूरा अस्पताल गंदगी से बजबजा रहा था। ऐसे में रविवार को बीमार रहे संयुक्त जिला चिकित्सालय में मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा का कितना लाभ हुआ होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
दो बच्चों की नहीं हो सकी एसएनसीयू
संयुक्त जिला चिकित्सालय में संडे को एक किलकारी गूंजी। मऊ निवासी रागिनी पत्नी एसपी शुक्ल ने एक बच्चे को जना। 20 जुलाई को इमली गांव निवासी प्रिया पत्नी गोविंद पांडेय की डिलेवरी हुई। प्रिया के बेटे को पीलिया होने की आश्ंाका थी तो रागिनी के बच्चे का बदन नीला होता जा रहा था। दोनो बच्चों की एसएनसीयू (सिंक न्यू बार्न केयर यूनिट) में रखे जाने की जरूरत थी। लेकिन अस्पताल से स्टॉफ नर्स और चिकित्सकों के गायब रहने से कोई भी नवजात शिशुओं की देखभाल करने वाला नहीं रहा। ऐसे में यदि किसी नवजात के साथ कोई अनहोनी हो जाय तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
करोड़ खर्च होने के बाद भी मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
संयुक्त जिला चिकित्सालय में बच्चों की सेंकाई करने समेत कई कीमती मशीनें करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद आई हैं। लेकिन कर्मियों की लापरवाही के चलते इनका लाभ अस्पताल आने वाले मरीजों को नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं प्रयोग में न लाए जाने से करोड़ों रुपये की मशीनें धीरे-धीरे कबाड़ हो रही है। जिम्मेदार हैं कि वह मामले में अपनी चुप्पी नहीं तोड़ रहे हैं।
अस्पताल में स्टॉफ द्वारा की जा रही लापरवाही की शिकायत कई बार मिल चुकी है। मुझे कार्रवाई का अधिकार नहीं है। इस बावत मैने कई पत्र सीएमओ को भेजे हैं लेकिन आज तक लापरवाह नर्स, चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ शिकंजा नहीं कसा जा सका। अस्पताल में मौजूद रहने पर प्रयास रहता है कि मरीजों को अधिक से अधिक चिकित्सीय सुविधा का लाभ दिला सकूं।
रामजी पांडेय, सीएमएस
संयुक्त जिला चिकित्सालय