संयुक्त जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों का हाल बेहाल है। भीषण तपिश और गर्मी के बीच मरीजों की रात की नींद और दिन का चैन छिन चुका है। बिजली चली जाने के बाद अस्पताल के अफसर जेनरेटर नहीं चलवाते। ऐसे में मरीज हाथ से पंखा झलकर गर्मी से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं। अफसर हैं कि मरीजों की शिकायत के बाद भी जेनरेटर नहीं चलवा रहे हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में मरीजों को प्रकाश और हवा उपलब्ध कराने के लिए लाखों की लागत से जेनरेटर लगवाया गया है। मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए जिला अस्पताल में जेनरेटर चलाने के लिए तेल के बजट का भी बेहतर इंतजाम है लेकिन लाखों की लागत से लगवाया गया जेनरेटर शो-पीस बनकर रह गया है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में अस्पताल के मरीज तड़प रहे हैं। बिजली चले जाने के बाद मरीजों का बुरा हाल हो जाता है। इसकी शिकायत मरीजों के परिजनों ने कई बार सीएमएस से की लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा है।
रविवार को भी ऐसा ही नजारा अस्पताल में देखने को मिला। बिजली चले जाने के बाद मरीज हाथ के पंखे से गर्मी दूर करने का प्रयास कर रहे थे पर अस्पताल के जिम्मेदारों ने जेनरेटर चलाने की जहमत नहीं उठाई। मामले में सीएमएस रामजी पांडेय का कहना है कि बिजली चले जाने पर जरूरत के हिसाब से जेनरेटर चलवाया जाता है। रविवार को जेनरेटर क्यों नहीं चला इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।