आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। पूर्व जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के स्थानांतरण के तुरंत बाद प्रभारी डीपीओ रामेश्वर पाल पर गंभीर आरोप लगे हैं।
आरोप है कि डीपीओ ने उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के उद्देश्य से एक माह पुराने पत्र को आधार बनाकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर नई पत्रावली तैयार कर दी। इस मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मामला सरसवां ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रायपुर से जुड़ा है। विद्यालय प्रबंध समिति के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 2023-24 में आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति दी गई थी। निर्माण कार्य प्रारंभ न होने और धनराशि के दुरुपयोग के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान अनूप कुमार को 21 मई एवं 28 अक्तूबर 2025 को नोटिस जारी किया था।
वहीं, दोषी पाए जाने पर ग्राम सचिव मनोज कुमार सोनी को 25 अक्तूबर 2025 को निलंबित कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि 29 अक्तूबर 2025 को तत्कालीन डीएम मधुसूदन हुल्गी के स्थानांतरण के बाद प्रभारी डीपीओ रामेश्वर पाल ने मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी के 30 सितंबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए नई पत्रावली तैयार कर दी।
मामले में सवाल उठ रहा है कि यदि यह पत्र एक माह पूर्व ही प्राप्त हो चुका था, तो उसे तत्कालीन डीएम के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया। नई पत्रावली में न तो प्रधान के विरुद्ध डीएम द्वारा की गई कार्रवाई का उल्लेख है और न ही निलंबित सचिव का कोई जिक्र किया गया है।
इतना ही नहीं, खंड विकास अधिकारी, सरसवां द्वारा 25 सितंबर 2024 को भेजे गए उस पत्र को भी नजरअंदाज कर दिया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि गाटा संख्या 279, खलिहान भूमि पर अवैध निर्माण कराया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि अब घासीपुर गांव की खलिहान भूमि में ही आंगनबाड़ी भवन निर्माण को वैध ठहराने की तैयारी के उद्देश्य से ही यह सब किया जा रहा है।
वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।