जिले में बौद्ध सर्किट का काम जोरों पर चल रहा है। ऐसे में पर्यटन की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर यमुना नदी पर पक्का घाट और बोटिंग क्लब विकसित करने की मांग उठाई है।
कोसम इनाम गांव के साजिद अली, पारसनाथ दुबे, धर्मनारायण चौधरी, अनिल कुमार, मुन्नूलाल, महेंद्र जैन और शिवनारायण आदि ग्रामीणों ने बताया कि यहां आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं को उचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए नदी किनारे पक्का घाट, शेड, शौचालय, पेयजल और विश्राम की सुविधाएं जरूरी हैं। वर्तमान में 50-60 हजार पर्यटक हर साल यहां आते हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की गुहार लगाई है।
1400 करोड़ की परियोजना पर चल रहा विकास कार्य
सरकार प्रदेश में बौद्ध सर्किट को विश्वस्तरीय रूप देने की दिशा में काम कर रही है। बुद्ध स्तूप, मठ और रेस्तरां सहित कई महत्वपूर्ण सुविधाओं को शामिल करते हुए लगभग 1400 करोड़ रुपये से परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें गेट कांप्लेक्स टीएफसी सेंटर, पार्किंग, शौचालय, पेयजल, कैफेटेरिया, पार्क, बुद्ध स्तूप और भगवान गौतम बुद्ध की 51 फीट ऊंची प्रतिमा सहित कई निर्माण शामिल हैं।
25 देशों से आते हैं बौद्ध अनुयायी
कौशाम्बी की यह ऐतिहासिक भूमि श्रीलंका, कंबोडिया, जापान, म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, नेपाल और भूटान सहित लगभग 25 देशों के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। वर्ष भर यहां धर्मावलंबी भगवान बुद्ध के तपस्थली स्थल का दर्शन करने आते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी रखी मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भी यमुना किनारे घाट और बोटिंग क्लब बनाए जाने की मांग को सही ठहराया है। उनका कहना है कि इससे कौशाम्बी का नाम वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और प्रखर रूप से उभरेगा।
यमुना किनारे पक्का घाट बनने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं बोटिंग क्लब से स्थानीय युवाओं को रोजगार भी प्राप्त होगा। -अमित कुमार त्रिपाठी
कौशाम्बी को बौद्ध सर्किट से जोड़कर विकसित करने की दिशा में बड़े अवसर मौजूद हैं। यदि यहां बुनियादी पर्यटन सुविधाएं विकसित कर दी जाएं तो प्रतिवर्ष आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो सकती है। -जयप्रकाश त्रिपाठी
यमुना किनारे पक्का घाट व बोटिंग क्लब निर्माण कराने का गाइडलाइन उनके विभाग में नहीं है। इसके लिए क्षेत्रीय सिंचाई विभाग या नगर पालिका चाहे तो करा सकता है।-कीर्तिमान श्रीवास्तव, जिला पर्यटन अधिकारी
जयप्रकाश त्रिपाठी
जयप्रकाश त्रिपाठी