डार्क जोन घोषित ब्लॉकों की ग्राम सभाओं में फर्जी बोरिंग सर्टीफिकेट पर नलकूप कनेक्शन देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सदर ब्लॉक के टेनशाह आलमाबाद गांव का है। यहां के एक खेतिहर ने अप्रैल माह में निजी बोरिंग कराई। इसके बाद ब्लॉक के फर्जी बोरिंग सर्टिफिकेट पर आवेदन कर कनेक्शन भी ले लिया। विभाग ने शासनादेश की परवाह किए बगैर उसे आनन-फानन में सामान भी मुहैया करा दिया। इससे साफ है कि विभागीय जिम्मेदारों को शासनादेश का तनिक भी खौफ नहीं है।
दोआबा के छह ब्लॉक डार्क जोन में हैं। इन ब्लॉकों में भूगर्भ जल संकट को देखते हुए शासन ने नलकूप बोरिंग और नलकूप को बिजली कनेक्शन देने पर प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन बिजली विभाग शासनादेश को दरकिनार कर धड़ल्ले से कनेक्शन बांट रहा है। इसमें नारा गांव की श्रीमती सिया शखी, सेहिया के दिनई, थुलगुला दारानगर के अमरनाथ, बेल्हाई काजू की पचानी देवी को फर्जी बोरिंग सर्टिफिकेट के सहारे कनेक्शन बांटा जा चुका है। मामला महकमे के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो इसकी छानबीन शुरू हुई। मामले में एक्सईएन विद्युत एके गौतम से कनेक्शन में लगे दस्तावेज भी तलब किए गए। इसके बावजूद महकमे के जिम्मेदार बेखौफ होकर डार्क जोन क्षेत्र में नलकूप कनेक्शन बांट रहे हैं।
ताजा मामला सदर ब्लॉक के टेनशाह आलमाबाद गांव का है। यहां की सुदामा देवी पत्नी बाबूलाल ने अप्रैल माह में नई बोरिंग कराई। इसने बिजली विभाग में नलकूप कनेक्शन के लिए आवेदन किया। नलकूप कनेक्शन देने के लिए विभागीय जिम्मेदारों ने पुरानी बोरिंग सर्टिफिकेट मांगा। उपभोक्ता ने किसी तरीके से पुराना बोरिंग सर्टिफिकेट हथिया लिया। इसी के आधार पर विभागीय जिम्मेदारों ने केवल कनेक्शन बल्कि सामान भी मुहैया करा दिया। डार्क जोन में माह भर के भीतर बोरिंग और नलकूप कनेक्शन होने की जानकारी अन्य ग्रामीणों को हुई तो वह हैरत में पड़ गए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि शासन ने डार्क जोन वाले ब्लॉकों में भले बोरिंग और विद्युत कनेक्शन प्रतिबंध लगा रखा है पर बिजली विभाग के लिए इसका कोई मायने नहीं है।