भरवारी। कस्बे के खल्लाबाद निवासी सैफ अहमद को एक जुनून ने उसे वैज्ञानिक बना दिया। महज दसवीं पास सैफ ने कबाड़ से खरीदे गए समान को साइकिल में लगाकर उसे बाइक बना डाला। सड़क पर फर्राटा भर रही सैफ की साइकिल कम बाइक इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
खल्लाबाद निवासी सईद अहमद आटा चक्की लगाए हुए हैं। उनका बेटा सैफ दसवीं पास है। हाईस्कूल के बाद सैफ ने मोटर बाइडिंग का काम शुरू किया। छह महीने तक गोवा में काम करने के बाद सैफ घर लौट आया। ऑनलाइन उसने कबाड़ के तमाम समान खरीदें और उसे मिलाकर रेंजर साइकिल को बाइक बना डाला। सैफ बताता है कि उसने ऑनलाइन साइकिल का चिमटा, कबाड़ में रखे बाइक का इंजन और टायर खरीदे। इसके बाद सभी को रेंजर साइकिल में फिट कर बाइक बना दिया। सैफ की साइकिल कम बाइक की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की है। वह एक लीटर पेट्रोल में 80 किलोमीटर चलती है। सैफ ने बताया इस काम में उसका करीब 30 हजार रुपया खर्च आया है। सारा दिन भरवारी इलाके में सैफ की साइकिल फर्राटा भरते देखी जा सकती है।
सैफ के साइकिल की खासियत है कि वह पेट्रोल से चलती है, इसके अलावा अगर बीच रास्ते में पेट्रोल समाप्त हो जाता है तो उसे पैंडल मार कर भी चलाया जा सकता है। इस बाबत जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक वसीम अहमद का कहना है कि नव प्रर्वतन अभियान के तहत इसी तरह के जुगाड़ वाले वैज्ञानिकों को प्लेटफार्म दिया जा रहा है। सैफ के आविष्कार की जानकारी नहीं है। अगर वह आवेदन करता है तो उसके बनाए हुए मॉडल को जिला स्तर पर लगने वाली प्रदर्शनी में रखा जाएगा।