कुपोषित बच्चों व नेत्र रोगियों को नया जीवन देने वाली संस्था दोआबा विकास उत्थान समिति करारी का शनिवार को रजत जयंती समारोह था। इस मौके पर रात में मुशायर का आयोजन किया। नामी-गिरामी शायरों ने अपने कलाम पढ़कर लोगों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत संस्था के सचिव परवेज रिजवी ने मुख्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुंबई से आए शायर शमीम अब्बास ने शेर पढ़ा कि इक झलक गाहे-बगाहे कभी मिल जाती थी, उसके दर हम जो दिया करते थे धरना-वरना। इसके बाद शायर असलम इलाहाबादी ने पढ़ा कि हमारे मुल्क का माहौल गरम है या रब, तू ठंडी-ठंडी हवाओं का रुख इधर कर दे। असलम इलाहाबादी के इस कलाम ने भी खूब तालिया बटोरीं।
कानपुर के कवि कमल किशोर ने पढ़ा कि गजल कोठे से उतर आ गई फुटपाथ पर, पांव में घुंघरू नहीं पत्थर लिए हैं हाथ में। कानपुर के ही मृदुल तिवारी ने पढ़ा कि जिनके हाथों में पतवार, उनका संदिग्ध है किरदार। इस मौके पर पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार, अजलम, रेहान, मुकेश और मजलिसी आदि रहे।