मंझनपुर। मनरेगा घोटाले में कौशाम्बी कई प्रधान और अफसरों का फंसना तय है। मनरेगा कार्यों की सीवीआई जांच तेजी से शुरू की गई है। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी को गांवों में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्याें की रिपोर्ट और अभिलेख सप्ताहभर में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सीडीओ ने बीडीओ और डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की है।
कौशाम्बी में भी मनरेगा योजना में जमकर खेल हुआ है। अभिलेखों में हेराफेरी करके प्रधान और ग्राम विकास अधिकारियों ने लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया है। प्रदेश में मनरेगा विकास कार्यों की सीबीआई जांच चल रही है। जांच की आंच कौशाम्बी में भी पहुंच चुकी है। सीबीआई ने जिलाधिकारी से सभी 440 गांवों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्याें की रिपोर्ट और अभिलेख मांगा है। डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी से मनरेगा कार्यों की रिपोर्ट और अभिलेख मांगा है। सीडीओ ने पत्र भेजकर सभी खंड विकास अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी को मनरेगा कार्यों की ब्यौरा तैयार करके सात दिन में मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
उधर, बीडीओ ने सभी प्रधान और ग्राम विकास अधिकारियों से अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं डीपीआरओ ने सहायक विकास अधिकारियों को भी अभिलेख तैयार करने की हिदायत दी है। यदि गहराई से जांच हुई तो कौशाम्बी में कई प्रधान और ग्राम विकास अधिकारियों का फंदे में फंसना तय है। इससे घबड़ाकर जिम्मेदार अभिलेख देने में कतरा रहे हैं। सीडीओ बीएन मिश्रा का कहना है कि जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर सीबीआई को मुहैया कराई जाएगी।