मंझनपुर। तीन-तीन जवान बेटों के साथ भरा-पूरा परिवार होने के बाद भी भानीपुर की 80 वर्षीय कलुईया शुक्रवार को जिला अस्पताल में लावारिस मौत मिली। सड़क हादसे में जख्मी होने के बाद वह 12 दिनों तक अस्पताल में दर्द से कराहती अपनों की राह देखती रहीं, लेकिन दिल्ली में नौकरी करने वाले तीनों बेटों ने उसकी सुधि नहीं ली। मौत के बाद एक बार फिर परिजनों को खबर देकर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। खबर लिखे जाने तक परिवार का कोई भी सदस्य आया नहीं था।
सैनी कोतवाली क्षेत्र के भानीपुर गांव की रहने वाली कलुईया देवी के पति जुगनू की कई साल पहले मौत हो चुकी है। उसके तीन बेटे हैं, जो दिल्ली में नौकरी करते हैं। साथ ही परिवार समेत वहीं रहते भी हैं। उसके साथ एक नाती यहां गांव में रहता था। वह भी करीब तीन महीने पहले ईंट भट्ठा में कमाने चला गया। तभी से वह घर में अकेली रहती थी। गांववाले बताते हैं कि 80 साल की बूढ़ी महिला की कुछ दिनों से तबीयत खराब रहती थी। इस पर 25 जनवरी की सुबह वह दवा के लिए जिला अस्पताल गई थी।
बताया जाता है कि रास्ते में ही किसी वाहन की चपेट में आने से वह घायल हो गई थी। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उसे भर्ती कराने अस्पताल गया सैनी कोतवाली का होमगार्ड वापस चला गया। बताया जाता है कि मार्ग हादसे में वृद्धा के घायल होने की जानकारी पुलिस ने उसके घरवालों को दे दी थी। पर, घायल वृद्धा 12 दिनों तक दर्द से कराहते ही अस्पताल में पड़े-पड़े अपनों के आने का इंतजार करती रही।
इसी इंतजार में उसने शुक्रवार की सुबह हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद ली। मौत की सूचना पर पहुंची मंझनपुर कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इतना कुछ होने के बाद भी घर का कोई भी सदस्य मौके पर नहीं आया था। एसओ ने बताया कि गांववालों से उसके ईट भट्ठे पर काम करने वाले नाती को मौत की सूचना पहुंचा दी गई है। उसके आने पर शव का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार के लिए दे दिया जाएगा।