आधा दर्जन जिलों में एक बार फिर से बालू का संकट खड़ा होने जा रहा है। इससे संबंधित जिलों में निर्माण से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति प्रभावित होने के साथ-साथ निजी निर्माण पर संकट रहेगा। छह माह के लिए दिए गए आठ खनन पट्टों की अवधि 30 नवंबर को समाप्त हो रही है। नए खनन पट्टों की सारी प्रक्रिया पूरी होने में मई तक का समय लगेगा। इस दौरान लोगों को बालू की किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
यमुना घाटों से निकलने वाले मोरंग से जिले के अलावा प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, लखनऊ, रायबरेली, फैजाबाद, भदोही आदि जिलों में निर्माण कार्य कराए जाते हैं। मजबूती में बेमिसाल होने की वजह से यहां की बालू को सरकारी भवनों, पुल आदि में भी लगाया जाता है। पट्टे न होने और सीबीआई जांच की वजह से जिले में बालू खनन पूरी तरह से बंद हो गया था। इसके चलते जनवरी से लेकर जून तक जिले में बालू को लेकर हायतौबा मच गई थी।
विकास कार्यों में शौचालय, आवास सहित अन्य कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे थे। इसे देखते हुए शासन ने जिले के आठ बालू घाटों की छह माह के लिए ई-टेंडरिंग कराई। छह माह के खनन पट्टे में जून माह में 18 दिन ही खनन हो सका। बारिश के बाद एक अक्टूबर से शुरू खनन पहली दिसंबर को अवधि समाप्त होते ही बंद हो जाएगा। बालू का खनन बंद होते ही कौशांबी के अलावा आधा दर्जन जिलों का निर्माण कार्य प्रभावित होना तय है। उधर नए पट्टों की प्रक्रिया तो जिले में चल रही है पर मई से पहले खनन शुरू हो पाना संभव नहीं है। ऐसे में आगामी छह माह तक दोआबा सहित आधा दर्जन जिलों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए एक बार फिर से बालू का संकट उत्पन्न होता दिख रहा है।