इसे खनन विभाग की लापरवाही कहें या तकनीकी खामी। जो भी हो जिले की सरहद पार करते ही यमुना की बालू मोरंग बन जाती है। इसके चलते इलाहाबाद के मुकाबले कौशाम्बी में ढाई गुना अधिक कीमत अदा करनी पड़ रही है। बुधवार को विधायक चायल की शिकायत को जिले के दौरे पर आए सीएम ने गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने प्रकरण की जांच कराकर मुकम्मल निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
कौशाम्बी में यमुना से निकलने वाली बालू को लेकर खनन विभाग ने एक बड़ा तकनीकी खेल किया है। यहां की बालू की गुणवत्ता बेहतर प्रदर्शित कर मोरंग बना दिया गया। जबकि यही यमुना सरहद पार कर इलाहाबाद पहुंचते ही बालू बन जाती है। इसके चलते कीमतों में भारी अंतर आ गया है। इलाहाबाद में जिस यमुना बालू की रायल्टी 65 रुपये घन मीटर निर्धारित की गई है। उसी यमुना बालू की कौशाम्बी में मोरंग के नाम से 150 रुपये रखी गई है। इसके चलते सरकारी खजाना भर रहा है। पर, दूसरी तरफ दोआबा के वाशिंदों की जेब भी ढीली हो रही है। विधायक चायल संजय गुप्ता ने पिछले दिनों मामला सदन में उठाया तो अफसरों ने गुमराह कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। बुधवार को कौशाम्बी दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने एक बार फिर विधायक चायल ने मुद्दा उछाला तो उन्होंने गंभीरता दिखाई। बताया जा रहा है कि सीएम ने प्रकरण की जांच कर मुकम्मल निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।