मंझनपुर। पशु तस्करों का साथ देना कोखराज एसओ को महंगा पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने बृहस्पतिवार रात एसओ को पैदल करते हुए उनके कारखास सिपाही को निलंबित कर दिया। अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस कप्तान ने यह कार्रवाई की है। एसपी की इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है।
बता दें कि पुलिस अफसरों की हिदायतों के बाद भी द्वाबा के रास्ते प्रतिबंधित मवेशियों की तस्करी धड़ल्ले से जारी है। रोजाना हाईवे से जानवरों की खेप वध के लिए गैर प्रांत भेजी जाती थी। यह काम पुलिसिया संबंध से ही होता है। अरसे से पुलिस और पशु तस्करों के बीच चल रहे इस खेल का भंड़ाफोड़ बुधवार की रात पशु तस्करों की धरपकड़ में हुआ। इसकी भनक लगते ही देर रात कोखराज कोतवाली पहुुंचे पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने थानेदार को जमकर फटकार लगाई थी। इतना ही नहीं उन्होंने मामले की प्रारंभिक जांच भी शुरू कराई। बृहस्पतिवार देर रात एलआईयू की प्रारंभिक जांच के बाद एसओ कोखराज जेपी यादव को पैदल करते हुए एसपी ने थानेदार के कारखास सिपाही अरुण कुमार को निलंबित कर दिया। कद्दावर थानेदार और सिपाही पर कार्रवाई की भनक लगते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
पशुतस्करों का साथ देने में एसओ कोखराज जेपी यादव को हटाने के बाद पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बृहस्पतिवार रात ही पिपरी एसओ रहे पीके यादव को कोखराज थाने की कमान सौंप दी। इसके अलावा एसओजी प्रभारी रहे विपिन त्रिवेदी को करारी का एसओ बनाया है। सत्ता की हनक रखने वाले लाइन में पड़े विनोद यादव को पिपरी का प्रभारी बनाया है। इसी तरह से एसओ चरवा रहे मोहम्मद हासिम को एसओ पुरामुफ्ती, एसओ कौशाम्बी रामेन्द्र तिवारी को एसओ चरवा, देवीगंज चौकी प्रभारी रामआसरे को एसओ कौशाम्बी, एएसआई अनिल कुमार सिंह को एसओ पश्चिमशरीरा बनाया है।
पशु तस्करी में संलिप्त बसपा नेता लाला कुरैशी निवासी ननमई को बचाने के लिए देर रात तक जिले के कई दिग्गज जूझते रहे। इस दौरान कई कद्दावर नेताओं के फोन लखनऊ तक हनहनाए। पर, सारी कवायदों पर पुलिस की कार्रवाई भारी पड़ी। बता दें कि द्वाबा के रास्ते गैर प्रांत से प्रतिबंधित पशुओं की तस्करी में लाला कुरैशी के साथ याकूब निवासी सैलाबी और तौसीफ बरसों से चर्चा में रहे हैं। बुधवार की रात इनकी धरपकड़ करके पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ पशु तस्करी का मामला भी दर्ज कर लिया है। लाला कुरैशी और उनके साथियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर रातभर जिले का सियासी माहौल गरम रहा। कई दिग्गज नेता इन्हें बचाने की कवायद में अपनी पूरी ताकत से साथ जुटे रहे। हालांकि इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। इतना जरूर रहा कि नेताओं की जोरदार पैरवी और रसूख के कारण थाने से ही मुचलके पर छूटने पर ये लोग सफल रहे।
द्वाबा के रास्ते पशु तस्करी कराने के मामले में कोखराज कोतवाली अव्वल साबित हुई। अफसरों की हिदायत को ताक पर रख पशु तस्करी का सिलसिला बेखौफ चलता रहा। पशु तस्करों द्वारा प्रति सप्ताह सिपाही को 25 हजार और एसओ को 50 हजार रुपये की मोटी रकम दिए जाने की चर्चा है। इसी मोटी आमदनी के कारण पुलिस पशुतस्करों का साथ देती थी। बृहस्पतिवार को पशुतस्करों की धरपकड़ के बाद इसका भी खुलासा हुआ है।
पशु तस्करी में कोखराज पुलिस की संलिप्तता के बाद अफसरों ने मान लिया है कि द्वाबा के रास्ते अर्से से प्रतिबंधित पशुओं को गैर प्रांत वध के लिए भेजे जाने का यह सिलसिला चल रहा था। पुलिस अधीक्षक एसए पंकज ने बताया कि पशु तस्करी जैसा गैरकानून काम जिले के रास्ते से रोकना पुलिस की प्राथमिकताओं में से एक है। जिलेभर में अभियान चलाकर पशुतस्करों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा पशु तस्करों का साथ देने वालों को भी किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि कौशाम्बी में सैनी, पइंसा, मंझनपुर, पश्चिमशरीरा, करारी, कौशाम्बी, कोखराज, पुरामुफ्ती के रास्ते रोजाना पशुओं से लदे वाहन निकलते हैं। आए दिन पशुओं से भरे वाहनों की धरपकड़ से बार-बार खुलासा भी हुआ है कि कौशाम्बी के रास्ते पशुतस्करी हो रही है। इसके बाद भी पुलिस इस काले कारोबार को रोक पाने में अब तक सफल नहीं हो सकी है।