दूध का दूध पानी का पानी हो चुका है। साबित हो चुका है कि गांजा बिक रहा है। बस जगह बदली है। आबकारी विभाग पूरी तरह से बेनकाब हो गया है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला पड़ताल छपने के बाद पूरे जिले में सनसनी है। जिले में सड़क पर कदम-कदम पर गांजा बिक रहा है इसका खुलासा होने के बाद जिला आबकारी अधिकारी और इंस्पेक्टर की सांसें अटक गई है। आबकारी टीम दिन भर दौड़ी, मगर कहीं से भी गांजा बरामद नहीं कर सकी। ऐसे में अब गांजा के अवैध कारोबार को लेकर जिलेभर की निगाहें डीएम और एसपी पर टिक गई हैं। जबकि सफेदपोश गांजा कारोबारी के आगे अफसर नतमस्तक हो गए हैं।
दोआबा में भांग की 42 दुकानों में धड़ल्ले से गांजा की बिक्री की जा रही है। आबकारी से सांठगांठ के बाद कोखराज थाने के गिरजेश तिवारी ने सभी भांग की दुकानों का टेंडर अपने नाम करा लिया। इसके बाद गांजे की बिक्री शुरू हो गई। भांग की दुकानों में बिक रहे गांजे के खिलाफ अमर उजाला ने मुहिम छेड़ा। मुहिम का असर रहा कि डीएम अखंड प्रताप सिंह ने तीनों एसडीएम और डीओ आबकारी को दबिश देकर कार्रवाई का फरमान जारी किया। डीएम के फरमान पर रविवार को एसडीएम चायल अश्वनी कुमार और एसडीएम सिराथू विवेक चतुर्वेदी ने दो-दो दुकानों में दबिश देकर गांजा बरामद किया।
दुकानों को अधिकारियों ने सीज करते हुए संबंधित थाने में मामला दर्ज कराया। इससे आबकारी विभाग और भांग के अनुज्ञापियों में हड़कंप मच गया। दो दिन बीतने के बाद जिला आबकारी अधिकारी ने साफ कह दिया कि भांग की दुकानों में गांजा बिकना बंद हो गया। इस पर बुधवार को अमर उजाला की टीम गांजा कारोबार का खुलासा करने निकली। मंझनपुर और समदा की दुकान के सेल्समैन के बताने पर टीम ने गांजे की पुड़िया खरीदी। इस खबर को बृहस्पतिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो आबकारी अधिकारी और उनकी टीम बेनकाब हो गई। गांजा कारोबारियों में सनसनी फैल गई।
आबकारी अधिकारी को यदि भांग की दुकानों पर गांजा बिकने का सबूत चाहिए था तो अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में उन्हें यह भी मिल गया। अब इससे बड़ा सबूत आबकारी अधिकारी को और क्या चाहिए। मामले में उसकी चुप्पी अब जिले के लोगों में तरह-तरह की सवाल उठाने लगी है। यही हाल रहा तो लोगों में मन में यह बात बैठ जाएगी कि दोआबा में गांजे का कारोबार कोई और नहीं बल्कि आबकारी की शह पर होता है।
भांग की दुकानों पर गांजा बेंचकर दुकानदार आबकारी अधिकारी बीपी मानिक को चुनौती दे रहे हैं। दुकानदार खुलेआम गांजा बेच रहे हैं। जाहिर है कि उनके द्वारा गांजे की बिक्री कराना आबकारी अधिकारी को सीधी चुनौती है। इसके बावजूद आबकारी की टीम गांजा के कारोबार में संलिप्त भांग के दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
दुकान संचालक ने बुलाई बैठक
भांगों की दुकान के सफेदपोश संचालक गिरजेश तिवारी ने अपने साथी सोमेश के साथ संदीपन गंगा घाट पर किराए पर दुकान लेने वालों की बैठक बुलाई। वहां पर गांजा के कारोबार को आगे चलाने के लिए रणनीति तय की गई। गांजा कारोबारियों ने वहां पर प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर चिंता जताई। अब देखना ये है कि सफेदपोश संचालक की रणनीति क्या गुल खिलाती है। जबकि प्रशासन गांजा की धरपकड़ के लिए मुस्तैद हो रहा है।
जिले में गांजा बिक रहा है यह कौन नहीं जानता। मैं 15 दिन पहले आया हूं। जो व्यवस्था पहले से थी वह चल रही है। मैंने आने के बाद कुछ नया नहीं कर दिया। सब पहले से हो रहा है।
बीपी मानिक, जिला आबकारी अधिकारी