रविवार को जिला अस्पताल मंझनपुर में एक मरीज ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। अस्पताल के इमरजेंसी के सामने मरीज के परिजन डॉक्टर को तलाशते रहे। मगर डॉक्टर कमरे से नहीं निकले। आखिरकार उसकी जान चली गई। परिजन छाती पीट-पीटकर रोते रहे।
कौशाम्बी थाना क्षेत्र के मुस्तफाबाद गांव का रहने वाला हेमराज पुत्र मुन्नी लाल अग्रहरि ने घर में दुकान खोल रखी है। उसी से वह अपने परिवार का पेट पालता था। शनिवार की रात हेमराज की अचानक तबियत बिगड़ गई। घरवाले उसके इलाज में साधारण दवाइयों का इस्तेमाल करते रहे लेकिन आराम नहीं होने पर परिजन उसे इलाज के लिए बारा ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। जहां पर रविवार का दिन होने के कारण कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला।
केंद्र में मौजूद एक वार्ड ब्वाय ने मरीज को बिना जांचे ही रेफर कर दिया। रेफर होने के बाद परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए। यहां पर भी वही हाल रहा। परिजनों के काफी खोजबीन करने के बाद अस्पताल में मिले एक वार्ड ब्वाय ने मरीज को चेक किया और मृत घोषित कर दिया। अधेड़ के परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उसका इलाज हो जाता तो जान बच सकती थी। अब अधेड़ की मौत का जिम्मेदार बारा ब्लॉक है कि जिला अस्पताल। अफसरों के लिए यह जांच का विषय बना हुआ है। परिजनों ने अधेड़ के शव को वापस घर ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया है। अधेड़ की मौत के बाद घर परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
कमीशन पर मरीज रेफर करने का चल रहा खेल
सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से निजी नर्सिंगहोमों में मरीजों को रेफर करने का खेल चल रहा है। अस्पतालों में कार्यरत ज्यादातर एमओआईसी कमीशन लेकर कारखासों के प्राइवेट अस्पतालों को मरीज रेफर करने में जुटे हैं। इससे डॉक्टरों को मोटी रकम मिलती है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी भी डॉक्टरों के इस कारनामे को नजर अंदाज कर रहे हैं। वहीं झोलाछाप अस्पतालों के संचालक मालामाल हो रहे हैं।
जिले में 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 29 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। आजाद नगर मंझनपुर के रमाकांत मिश्रा, जितेंद्र कुमार, गिरधरपुर के मोहित कुमार, गनपा के पप्पू मिश्रा, जलालपुर के इंद्रकुमार, छोगरियन के पुरवा के प्रदीप कुमार का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंझनपुर समेत जिले की अस्पतालों में तैनात एमओआईसी निजी अस्पताल के संचालकों से कमीशन लेकर मरीजों को रेफर कर रहे हैं। इससे गरीबों को निजी नर्सिंग होमों में जेब ढीली करनी पड़ती है। चिकित्सकों की मनमानी के कारण निर्धनों का उत्पीड़न किया जा रहा है। मंझनपुर स्थित ज्यादातर अस्पतालों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंझनपुर, जिला संयुक्त चिकित्सालय से मरीजों को रेफर किए जाने का खेल चल रहा है। मंझनपुर पीएचसी से यहां पर एक निजी अस्पताल में मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।