मंझनपुर (कौशाम्बी)। कौशाम्बी डायट में फर्जीवाड़ा करके बीटीसी प्रशिक्षण में प्रवेश लेने वाले आठ और जालसाज फंस गए हैं। इन प्रशिक्षुओं ने यूपी बोर्ड और विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंकपत्रों में हेराफेरी करते हुए अंक बढ़ाकर बीटीसी चयन 2012 में प्रवेश करा लिया है। डायट प्राचार्य की जांच में मामले का खुलासा हुआ है। संबंधित प्रशिक्षुओं को नोटिस जारी करके सप्ताहभर में जवाब मांगा गया है। प्राचार्य ने बताया स्पष्टीकरण आने के बाद चयन रद्द करके इन्हें संस्थान से बाहर कर दिया जाएगा।
बीटीसी चयन 2012 में जालसाजी करके प्रवेश लेने वाले प्रशिक्षुओं की तादात दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। फर्जीबोर्ड की मार्कशीट से चयन का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि यूपी बोर्ड और विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंकपत्रों में हेराफेरी करके अंक बढ़ाकर चयन कराने का मामला सामने आ गया है। प्रशिक्षुओं की यह करतूत डायट प्राचार्य नरेंद्र शर्मा की जांच में सामने आई है। प्राचार्य ने बताया कि आठ प्रशिक्षुओं के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया है। सत्यापन रिपोर्ट में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातक अंकपत्रों में हेराफेरी करके मार्क्स बढ़ाए गए हैं। बताया कि सभी प्रशिक्ष्ुाओं को नोटिस भेजी गई है। सप्ताहभर में इनसे जवाब देने को कहा गया है। प्रशिक्षुओं का स्पष्टीकरण आने के बाद इनका भी चयन रद्द करके डायट से निष्कासित किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दिल्ली और सेंट्रल आरए बोर्ड नई दिल्ली की फर्जी मार्कशीट से 22 प्रशिुओं के बीटीसी चयन 2012 में प्रवेश लेने का मामला सामने आया था।
जिलाधिकारी ने संबंधित प्रशिक्षुओं का चयन रद्द करके उन्हें निष्कासित कर दिया है। इसी तरह सीएमजी यूनिवर्सिटी मेघालय के 14 प्रशिक्षुओं पर कार्रवाई की गई है। मामले में प्राचार्य नरेंद्र शर्मा का कहना है कि मार्कशीट में अंक बढ़ाकर बीटीसी में फर्जी चयन का खुलासा गंभीर है। कहा कि सभी प्रशिक्षुओं के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। गड़बड़ी मिलने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इससे डायट में हड़कंप मचा हुआ है।
फर्जीवाड़ा में पकड़े गए 22 प्रशिक्षुओं का नाम काटकर उन्हें निष्कासित कर दिया गया है। हालांकि इसके बाद भी प्रशिक्षुओं ने कर्मचारियों की मिलीभगत से अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा का फार्म भराने का प्रयास किया लेकिन प्राचार्य और प्रवक्ताओं की सक्रियता से वह सफल नहीं हो सके।