जिला मुख्यालय में स्थित सिटी अस्पताल में रविवार रात इलाज के दौरान एक मजदूर की मौत हो गई। इससे नाराज परिजनों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की जान गई। मौत के बाद उसका शव अस्पताल के लोगों ने सड़क किनारे रख दिया। इससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर अस्पताल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। सीएमओ ने जांच के लिए टीम भेजी लेकिन डॉक्टर ताला बंद कर स्टाफ समेत भाग चुका था ।
सदर कोतवाली के सहनपुर निवासी निशानी (40) भट्ठा मजदूर था। वर्ह इंट-भट्ठा में बुग्गी चलाकर परिजनों का भरण-पोषण करता था। रविवार सुबह वह घर आया। उसकी तबीयत खराब थी। दोपहर को उसके सीने में तेज दर्द हुआ। हालत खराब होने पर पत्नी राधा अपने भाई राजेश की मदद से उसको लेकर दीवर कोतारी स्थित एक अस्पताल पहुंची। वहां मौजूद डॉ. सीताराम ने निशानी को ग्लूकोज की बोतल लगा दी।
हालत में सुधार न होने पर डॉ. सीताराम ने उसे मंझनपुर के सिटी अस्पताल रेफर कर दिया साथ ही बताया कि यह अस्पताल भी उसी का है। वहां सारी व्यवस्था है। पति को लेकर राधा शाम को सिटी अस्पताल आई। यहां भी निशानी को ग्लूकोज ही चढ़ाया गया। इस दौरान राधा ने डॉक्टर सीताराम से कहा कि वह उसके पति को रेफर कर दें लेकिन रेफर नहीं किया गया। रात करीब नौ बजे निशानी की मौत हो गई।
आरोप है कि डॉक्टर के कहने पर स्टाफ ने शव उठाकर सड़क किनारे रख दिया। इससे राधा व उसके साथ रहे परिजन भड़क गए। उन्होंने जमकर हंगामा किया। सूचना पर सदर कोतवाली पुलिस पहुंची। मामले में राधा की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. सीताराम समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
इसकी जानकारी सीएमओ दीपचंद्र मालवीय को हुई तो अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में जांच के लिए एक टीम भेजी। मगर टीम पहुंचने से पहले ही डॉ. सीताराम स्टाफ को लेकर भाग चुका था। अस्पताल में ताला बंद था। टीम नोटिस चस्पा कर वापस चली आई।