दोआबा के हर तीसरे गांव में कच्ची शराब का अवैध कारोबार चल रहा है। इससे अवैध कारोबारी मोटी रकम भी कमा रहे हैं वहीं विभाग का सर्च आपरेशन कागज तक सिमट चुका है। इक्का-दुक्का कार्रवाई कर आबकारी पुलिस खुद अपनी पीठ थपथपा लेती है। आजमगढ़ में जहरीली शराब पीने से 27 लोगों की हुई मौत के बाद यहां के जिम्मेदारों को कार्रवाई की सुध आई।
दोआबा की 20 लाख आबादी के बीच कच्ची शराब बनाने और बेचने का काला कारोबार अर्से से चल रहा है। 498 ग्राम सभाओं के बीच करीब दो सौ गांवों में महुआ की शराब दिन-रात बनती है। जिले में भी जहरीली शराब पीने कई हादसे हो चुके हैं। वैसे तो एक-दो पियक्कड़ों की आए दिन मौत होती रहती है। इसे या तो बीमारी से मौत बताकर टरका दिया जाता है। हादसों के बाद ही अफसरों की नींद टूटती है।
जिला प्रशासन और पुलिस अफसरों की अनदेखी के चलते गोरखधंधे में जुडे़ कारोबारी रोजाना सैकड़ों लीटर मौत की दवा बनाकर बेंच रहे हैं। आबकारी विभाग की सूची में सिर्फ सौ गांव और 10 कारोबारी हैं। यह कारोबारी शराब बनवाने और पड़ोसी जिलों से देसी मदिरा की खेप लाकर बेंचने का काम करते हैं। पुलिस की कार्रवाई में कई बार इसका खुलासा भी हो चुका है। सिविल पुलिस तो आए दिन शराब के साथ लोगों को दबोचती रहती है पर आबकारी विभाग की कार्रवाई कागज तक ही सिमट जाती है।