बेजुबानों की तस्करी रोकने को पुलिस महकमे ने अपनी कमर कस लिया है। इस कालेधंधे से जुड़े लोगों को चिह्नित करने में कौशाम्बी पुलिस जुट गई है। इनकी कुंडली तैयार करके पुलिस जेल भेजने का जल्द ही अभियान चलाएगी। पुलिस ने अपने इस अभियान की तैयारी अपर पुलिस महानिदेशक कानून का पत्र आने पर शुरू की है।
पशुओं की खरीद-फरोख्त करके उन्हें वध के लिए दूसरों राज्यों में भेजने का कालाधंधा कौशाम्बी में अरसे से चल रहा है। यही नहीं कौशाम्बी के रास्ते आसपास के कई जिलों से भी पशु तस्करी का धंधा चल रहा है। शुक्रवार की रात को भी पुलिस ने मवेशियों से भरा ट्रक मंझनपुर में पकड़ा था।
इसमें पुलिस को 25 जिंदा और 8 मृत मवेशी मिले थे। इतना ही नहीं धरपकड़ के दौरान पर पशुतस्करों ने पुलिसकर्मियों को ट्रक से कुचलने का भी प्रयास किया था। पशुतस्करी और तस्करों के बेखौफ रवैये की खबर को रविवार के अंक में अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। इधर, जनपद और सूबे में धड़ल्ले से हो रही पशुतस्करी को गंभीरता से लेते हुए अपर पुलिस महानिदेशक दलजीत चौधरी ने बेजुबान के तस्करों को चिह्नित करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फरमान जारी किया है।
एसपी को पत्र भेजकर एडीजीपी ने पशु तस्करी के काले कारोबार से जुड़े लोगों पर शिकंजा कसने की हिदायत दी है। बता दें कि जिले से पशुओं की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। पुलिस आंकड़ों पर ही गौर करें तो वर्ष 2014 में पुलिस ने पशु तस्करी के 60 मुकदमे दर्ज किए थे। इस दौरान वध के लिए दूसरे राज्य भेजे जा रहे 774 मवेशी भी बरामद किए गए। वहीं वर्ष 2015 में देखें तो 75 से अधिक पशु तस्करी के मामले जिले के विभिन्न थानों दर्ज हुए हैं।
कौशाम्बी में पशुतस्करों का सरगना इस्तियाक उर्फ कालिया जिले की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। अर्से से वह पुलिस को चकमा देकर पशु तस्करी के कालेधंधे में संलिप्त है। सूत्रों की मानें तो पुलिस कालिया पर शिकंजा नहीं कस पा रही है। जबभी पशुतस्करों की धरपकड़ का अभियान चलता है। पुलिस उसके गुर्गे को ही दबोच पाती है। शुक्रवार की रात भी पशु तस्करों का यह सरगना पुलिस की गिरफ्त में चढ़ने से बच गया।