दीवाली आते ही जिले के कई कस्बों व गांवों में अवैध तरीके से पटाखा बनाने का कारोबार तेज हो गया है। दुकानदारों की डिमांड पर पटाखे बनाए जा रहे हैं। नियम कानून को धता बताकर पटाखा डंप किया गया है। इससे हादसा होने की संभावना है। इसके बावजूद पुलिस आंख मूंदकर बैठी है।
जिले में सरायअकिल, देवीगंज, मनौरी, भरवारी के अलावा अल्लीपुर में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से पटाखा बनाया जाता है। सरायअकिल में कई बार अवैध पटाखा बनाने वालों के यहां धमाका भी हो चुका है। इसमें कई जानें भी जा चुकी हैं। इसके बाद भी यह अवैध कारोबार बंद नहीं हुआ। दीवाली आते ही कारोबारियों ने अवैध तरीके से बारूद व अन्य सामग्री मंगाकर पटाखा बनाना शुरू कर दिया है। इन अवैध कारोबारियों के संपर्क में अस्थायी लाइसेंस पर पटाखा बेचने वाले दुकानदार रहते हैं।
अधिकांश दुकानदार इन्हीं से पटाखा खरीदते हैं। जोरदार आवाज में दगने वाले पटाखे इनको आर्डर देकर बनवाएं जाते हैं। पीस कमेटी की थानावार बैठक कर पुलिस अवैध कारोबार बंद कराने का दावा तो करती है, लेकिन कारोबारियों पर वह काबू नहीं पा रही है। गांव व कस्बों के भीतर पटाखा बनाए जाने से लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है। इसके बाद भी पुलिस की कार्रवाई ठंडी चल रही है।
युवाओं के लिए बनवाए जाते हैं पटाखे
अवैध तरीके से पटाखा बनाने वाले कारोबारी युवाओं की डिमांड का पूरा ध्यान देते हैं। युवाओं की दिलचस्पी को देखते हुए वह तेज आवाज वाले पटाखे बनाते हैं। दीवाली के दिन युवाओं में आतिशबाजी को लेकर प्रतिस्पर्धा होती है। कोई किसी से पीछे न रहे, इसलिए तेज आवाज के पटाखों की खरीदारी लोग करते हैं।