कौशाम्बी में करारी क्षेत्र के गुरैनी निवासी एलआईसी अभिकर्ता के नाम से इलाहाबाद चौक स्थित एक बैंक की शाखा में फर्जी खाता खोला गया। फिर 18 करोड़ रुपये का लेनदेन कर खाता बंद कर दिया गया। इसकी जानकारी भुक्तभोगी को तब हुई जब उसके पास आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा। भुक्तभोगी का आरोप है कि बैंक अफसरों की मिलीभगत से यह खेल हुआ। उसने मामले की शिकायत पुलिस से की है।
करारी कोतवाली क्षेत्र के चकगुरैनी (बैशकांटी) निवासी चंद्रभवन अग्रहरि पुत्र रामलखन एलआईसी अभिकर्ता हैं। उनका आरोप है कि एक बैंक की इलाहाबाद स्थित चौक शाखा में पिछले दिनों किसी ने उनके नाम से फर्जी खाता खुलवाया। वर्ष 2015-16 में खोले गए इस खाते से 18,32,63,238 रुपये का लेनदेन किया गया। इसके कुछ दिन बाद खाता बंद कर दिया गया। भुक्तभोगी को इसकी जानकारी तब हुई 10 दिसंबर को उन्हें आयकर विभाग की तरफ से नोटिस मिला। आरोप है कि उसने बैंक में जाकर खाते का विवरण मांगा तो उसे टरका दिया गया। आरोप है कि तीन दिन तक दौड़ाने के बाद भी मैनेजर ने जानकारी नहीं दी। इसके बाद भुक्तभोगी ने मैनेजर पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। बताया कि उसने रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से कोतवाली इलाहाबाद में शिकायती पत्र भेजा है। हालांकि प्रभारी कोतवाली मोइनुददीन बेग ने ऐसी कोई भी शिकायत मिलने से इंकार किया।
भुक्तभोगी का आरोप है कि यह पूरा खेल काले धन को सफेद करने के लिए किया गया। आरोप है कि बैंक मैनेजर की मिलीभगत से ही यह खेल खेला गया। ऐसा न होता तो उनके नाम से कैसे कोई व्यक्ति फर्जी खाता खोल पाता? भुक्तभोगी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।