चरवा के बलीपुर टाटा गांव से आजाद कराई गई मां-बेटी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। सीएमएस ने मां-बेटी की देखरेख के लिए डॉक्टरों का रोस्टर भी तय कर दिया है। एक स्पेशल डॉक्टर की मांग की गई है। इसकी जानकारी होते ही चायल विधायक संजय गुप्ता ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग पर शिकंजा कस दिया है। विधायक ने सीएमओ व सीएमएस से कहा कि इनके इलाज में किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए।
बलीपुर टाटा निवासी सरजू तिवारी ने अपनी पत्नी शशिकला व बेटी कंचनलता को घर में आठ साल से बंधक बना रखा था। इनको सरजू तिवारी प्रताड़ित करता था। कई-कई दिनों वह इनको भूखा रखता था। पेट दर्द होने पर बिना खाना दिए, इनको दवा खिलाता था। भूख से यह तड़पती-चिल्लाती थी तो गांव वालों को बताता था कि इन पर ब्रह्म राक्षस सवार है। इसी का हवाला देकर उसने गांव वालों को डरा रखा था। शनिवार को मां-बेटी पुरोहित पंडित अमित पांडेय के प्रयास से आजाद हुई। विधायक दो घंटे तक गांव में मौजूद रहे और पुलिस को बुलाकर इनको बाहर निकलवाया। हालत गंभीर होने पर मां-बेटी को जिला अस्पताल भेजा गया है।
जिला अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। इनकी देखरेख के लिए सीएमएस डॉ. दीपक सेठ ने डॉक्टरों का बाकायदा रोस्टर तय कर रखा है। मां-बेटी के इलाज के लिए न्यूरो चिकित्सक की मांग की गई है। सीएमएस ने सीएमओ को इसके लिए पत्र भेजा है। जिले में न्यूरो चिकित्सक के न होने की जानकारी चायल विधायक संजय गुप्ता को हुई तो उन्होंने सीएमओ डॉ. एसके उपाध्याय से बातचीत की। सीएमओ ने जल्द ही स्पेशल डॉक्टर बुलाकर मां-बेटी का इलाज कराने का आश्वासन दिया है। विधायक का कहना है कि मां-बेटी के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया है, इससे उनकी हालत खराब हुई है। इनके इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उधर हालत सामान्य न होने पर पुलिस ने अभी तक शशिकला व कंचन लता का बयान नहीं दर्ज किया है।