मंझनपुर। प्रकाश पर्व दीपावली व मिठाई के त्योहार को लेकर जिले में मिलावटखोरों का बाजार सज गया है। सरसों व सोयाबीन तेल से लेकर दूध, खोवा, पनीर, बेसन आदि खाद्य सामग्री में खुलेआम मिलावट कर उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन पर शिकंजा कसने के लिए बना खाद्य सुरक्षा विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर रहा है। सिर्फ छोटे दुकानदारों से नमूना भरने तक सीमित है। बड़े काले कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में छापेमारी नहीं होने से मिलावटखोर बेखौफ होकर अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इससे बेखबर उपभोक्ताओं की जेब ढीली होने के साथ ही बेसकीमती सेहत भी दांव पर लग रही है।
18 लाख की आबादी वाले जिले में प्रतिदिन तकरीब 90 हजार लीटर दूध का उत्पादन है। उत्पादन के मुकाबले वैसे ही खपत ज्यादा है। पर, आम दिनों के मुकाबले त्योहारों में मांग और बढ़ जाती है। जानकारों की मानें तो इसकी भरपाई के लिए कारोबारी मिलावट का खेल करते हैं। सूत्र बताते हैं कि केमिकल के घोल से नकली दूध में चिकनाई और फैट लाने के लिए रिफाइंड आयल मिलाया जाता है। झाग के लिए इजी शैम्पू व खराब न हो इसके लिए हाइड्रोजन पराक्साइड के साथ ही अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे तैयार दूध की कीमत सिर्फ 20 रुपये लीटर आती है। जबकि बाजार में इसे उपभोक्ताओं के हाथ 40-45 रुपये लीटर बेचा जाता है। इसी तरह से खोवा में मैदा, आलू और केमिकल मिलाकर मिलावट की जाती है।
दीपावली पर भारी मात्रा में मिठाई की खपत होती है। मिठाई की खरीदारी में उपभोक्ता के साथ कदम-कदम पर धोखा किया जा रहा है। सिंथेटिक मावे के साथ मिठाइयों में कृत्रिम मावे का इस्तेमाल हो रहा है। काजू कतली सरीखी महंगी मिठाई में भी मिलावट की जाती है। सूत्रों की मानें तो इसमें काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जाता है। त्योहार पर महंगाई को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से खोवा खरीदकर डंप कर लिया था। केमिकल लगाकर रखे गए इस खोवे से तैयार मिठाई को त्योहार पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसी तरह से बेसन में भी मैदा व खेसारी मिलाकर कारोबारी जेब भरने में लगे हैं।