मंझनपुर । धरती के दूसरे भगवान ने चंद पैसे की खातिर संवेदनाओं को एक किनारे रख दिया है। डायरिया पीड़ित मासूम शिवा की मौत के बाद बीमारों के लिए जिला अस्पताल में अलग से वार्ड तो खुला। पर, इलाज की जिम्मेदारी नीम हकीमों के जिम्मे छोड़ दी गई। अस्पताल में सफाई कर्मी डायरिया पीड़ित बच्चों के खून का नमूना ले रहा है। यही नहीं, खून की जांच के नाम पर उगाही की जा रही है। जानकारी के बाद भी अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के प्रति गंभीर नहीं है।
चरवा के बड़ी मौली गांव निवासी मासूम शिवा की मौत के बाद नींद से जागे स्वास्थ महकमे ने आनन-फानन जिला अस्पताल में डायरिया पीड़ित मरीजों के लिए नया वार्ड बना दिया। अस्पताल से भगाए गए शिवा के भाई शेखर, बहन सुरेखा व शेजल को भर्ती कर इलाज किया जाने लगा। यह सब तब हुआ जब खुद सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी ने मरीजों को यहां भर्ती कराया। इसके बाद से जिला अस्पताल में डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। रविवार को कड़ा की रोशनी व अंबावा गांव की स्वाती को भर्ती कराया गया।
सोमवार को भी इस अस्पताल में खूजा गांव के यश यादव (01) पुत्र नीरज यादव व हजरतगंज मंझनपुर के जवाहर की दस माह की बच्ची शशि को भर्ती कराया गया। अमर उजाला ने जिला अस्पताल की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। इन बीमार बच्चों का जो व्यक्ति ब्लड सेंपल ले रहा था वह अस्पताल में बतौर सफाई कर्मी तैनात है। इसके अलावा पैथॉलाजी में एक प्राइवेट व्यक्ति मुफ्त में होने वाली जांच के नाम पर धन उगाही कर रहा था। मरीजों के तीमारदारों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। इस पर उन्हें बच्चों को डिस्चार्ज कर देने की धमकी मिली। वहीं सीएमएस दीपक सेठ का कहना है कि जिस सफाई कर्मी की बात हो रही है वह प्रशिक्षण प्राप्त है और पहले संविदा में जिला अस्पताल में काम कर चुका है। अब वह सफाई कर्मी के तौर पर काम कर रहा है। अगर दिक्कत है तो उसे हटा दिया जाएगा। जांच के नाम पर पैसा लिए जाने की बात गलत है।
डॉ दीपक सेठ, सीएमएस