ऋण आवेदक के पिता की बीमारी का हवाला देकर चायल विधायक ने गुरुवार को जबरन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की शाखा मूरतगंज के मैनेजर से पॉलिसी की रकम वापस कराई। यह रकम बैंक मैनेजर ने अपने खाते से निकालकर ऋण आवेदक को दी। बैंक मैनेजर पर विधायक का आरोप था कि खादी ग्रामोद्योग का लोन स्वीकृत करने के लिए एक लाख की मांग कर रहे थे। इसके बदले उन्होंने आवेदक व उसके पिता के नाम जबरन बीमा करवाया था। आरोप है कि मैनेजर को धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर लिखवाने की धमकी भी दी गई थी। बैंक मैनेजर को हिदायत दी गई कि वह अपना तबादला कराकर किसी दूसरे जनपद चले जाएं।
देवरा निवासी संदीप कुमार मौर्य ने सितंबर 2016 में खादी ग्रामोद्योग से ऋण लेने के लिए आवेदन किया था। दस लाख रुपये का संदीप को लोन लेना था। खादी ग्रामोद्योग ने प्रोजेक्ट पास करके ऋण के लिए फाइल बड़ौदा उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की शाखा मूरतगंज भेज दी। इसके बाद संदीप मूरतगंज बैंक की शाखा मैनेजर उमेश चंद्र कक्कड़ से मिला। संदीप का आरोप है कि मैनेजर ने उससे 10 लाख लोन के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी। इंकार करने पर बाद में उसके नाम से 25 हजार और पिता के नाम से 41 हजार रुपये की बीमा पॉलिसी इंडिया फस्ट लाइफ कंपनी से करा दी। एक हफ्ता पहले संदीप के पिता की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में उन्हें एसपीजीआई (लखनऊ) में भर्ती कराया गया। हाल ही में उसने डीएम से इसकी शिकायत की तो उन्होंने लोन स्वीकृत करने का निर्देश दिया। संदीप ने बीमा पॉलिसी का रुपया वापस मांगा तो मैनेजर ने इंकार कर दिया। इसकी जानकारी संदीप ने गुरुवार को चायल विधायक संजय गुप्ता को दी। इस पर वह बैंक पहुंचे।
बैंक मैनेजर पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी। साथ ही बताया कि आवेदक बिहार व झारखंड के विहिप प्रभारी राजेंद्र मौर्य का भतीजा है। लखनऊ से इस संबंध में उनके पास फोन आ रहे हैं। वह तत्काल आवेदक का रुपया वापस करें। इसी बीच तहरीर लिखी जाने लगी तो दबाव में मैनेजर ने आवेदक को अपने खाते से 66 हजार रुपये वापस किए। विधायक ने शिकायत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के आरएम से भी की है। विधायक संजय गुप्ता का कहना है कि बैंक मैनेजर ने आवेदक से रिश्वत मांगी थी। लोन देने के नाम पर बीमा पॉलिसी कराया था, जिसके वह एजेंट हैं। मामले से आरएम को अवगत कराया गया है। जिला समन्वयक शिवराज सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। बैंक मैनेजर उमेश चंद्र कक्कड़ का कहना है कि विधायक जी जब आरोप लगा ही रहे हैं तो अब वह क्या कर सकते हैं। एफआईआर, छेड़खानी का आरोप सुनकर कौन कुछ बोलेगा। आरएम से भी विधायक ने श्किायत की थी। मैंने भी शिकायत की है।