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जिला जेल में आतंक का पर्याय बना माफिया का भाई

Tue, 30 Jun 2015 02:18 AM IST
हिमांशु भट्ट /अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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मंझनपुर। पुरामुफ्ती क्षेत्र के कुख्यात अपराधी अतीक उर्फ चंदन का शातिर भाई इन दिनों जिला कारागार में आतंक का पर्याय बना है। अपने पूर्व परिचित बंदियों के साथ जेल के भीतर संगठन बना अन्य बंदियों को वह प्रताड़ित करता रहता है। रोकने की कोशिश करने वाले बंदीरक्षकों और जेल अधिकारियों से वह भिड़ जाता है। उसकी इन हरकतों से जेल प्रशासन बहुत परेशान है। प्रभारी जेलर ने डीजे और डीएम को पत्र के माध्यम से पूरे मामले से वाकिब कराते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।
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पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के हटवा गांव का अतीक उर्फ चंदन शातिर अपराधी है। पशु तस्करी के अलावा लूट, छिनैती, जानलेवा हमले करने जैसे कई आपराधिक मामले उसके खिलाफ कौशाम्बी और इलाहाबाद के कई थानों में दर्ज हैं। अतीक ने अभी कुछ महीनों पहले ही इलाहाबाद कचहरी में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट की थी। इसी कुख्यात अतीक का भाई मतीन अहमद भी शातिर बदमाश है। मार्च में उसने गांव के ही एक युवक की हत्या का प्रयास किया था। तब से वह जिला कारागार में निरुद्ध है।

पशुक्रूरता निवारण अधिनियम की धाराएं भी उसके ऊपर लगी हैं। प्रभारी जेल अधीक्षक की मानें तो मतीन इन दिनों जेल में आतंक का पर्याय बन गया है। उसकी दादागीरी इतनी बढ़ गई है कि दूसरे बंदी और बंदीरक्षक उसके सामने खड़े होने से भी कतराते हैं। उसने अपने क्षेत्र के कुछ बंदियों को मिलाकर जेल के भीतर एक संगठन बना लिया है। इन्हीं शातिर साथियों के दम पर वह जेल के भीतर जमकर मनमानी कर रहा है। विरोध करने पर वह बंदियों से भिड़ जाता है। उनके साथ मारपीट करता है। बंदीरक्षकों और जेल अफसरों से भी अभद्रता करने से बाज नहीं आता। अभी 26  जून को उसकी अदालत में पेशी थी। मगर मतीन ने पेशी पर जाने से मना कर दिया। बंदीरक्षकों ने उसे पेशी पर ले जाने की कोशिश की तो वह उनसे भिड़ गया।
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गाली गलौज की। जेल के बाहर देख लेने की धमकी भी दी। उसके उत्पात से जेल के बंदी और अफसर परेशान हैं। प्रभारी जेलर ने डीजे और प्रभारी डीएम को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। भेजे गए पत्र में जेलर ने लिखा है कि उसकी वजह से जेल में गुटबाजी शुरू हो गई है। बंदियों के ये गुट किसी भी रोज जेल के भीतर खून खराबा कर सकते हैं। मामले में प्रभारी डीएम सुरेन्द्र कुमार का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल यदि जेलर ने ऐसा कोई पत्र उनके यहां भेजा होगा तो जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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