गोशालाओं के गोबर से अब किसानों की कमाई बढ़ेगी। गोशालाओं में गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन किया जा रहा है। उसे गांव के किसान खेतों में प्रयोग कर रहे हैं। इससे जहां एक ओर गोशालाओं और ग्राम पंचायतों की आय में वृद्धि हो रहा है, वहीं दूसरी ओर खेतों की उर्वरता बढ़ने से फसल पोषण से भरपूर हो रही हैं।
जिले में कुल 75 गोशालाएं हैं। इनमें से 43 गांव की गोशालाओं में वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन शुरू हो चुका है। सबसे अधिक वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन दानपुर, अफजलपुर सातो, भीखमपुर, नसीरपुर, पहाड़पुर सुधवर, जलालपुर साना, जुनैदपुर, कादीपुर, पुरखास, बूंदा, पेरई, टेवां, कोतारी पश्चिम, पइंसा, अनेठा, शेखपुर रसूलपुर और मलाक पिंजरी में होता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गंगवार ने बताया कि अन्य ग्राम पंचायतों में वर्मी कंपोस्ट पिट का निर्माण कार्य चल रहा है। 15 से 20 दिनों में काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद वहां भी खाद का उत्पादन किया जाएगा।
वर्मी कंपोस्ट का लाभ
वर्मी कंपोस्ट के प्रयोग से खेत की मिट्टी भुरभुरी और उपजाऊ बनती है। इसमें पानी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है। यह फसलों की पैदावार को 15 से 20 फीसदी तक बढ़ा देता है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मार्च से अब तक गोशालाओं के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को करीब डेढ़ लाख रुपये की आय हो चुकी है।
प्रयागराज-चित्रकूट जाती है खाद
- टेवां गांव में करीब दो साल पहले वर्मी कंपोस्ट का निर्माण शुरू हो गया था। प्रधान विट्टन देवी ने बताया कि गांव में तीन तरह की खाद गोशाला के माध्यम से तैयार हो रही है। केचुआ वाली खाद जहां एक हजार रुपये क्विंटल में बेची जा रही है। वहीं पिट वाली कंपोस्ट खाद 500 रुपये क्विंटल में बिक रही है।
इसके साथ ही गांव में गौस गोबर प्लॉट (बायोगैस प्लांट) लगा है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि गांव से प्रयागराज व चित्रकूट के नर्सरी वाले सबसे अधिक खाद ले जाते हैं। इस साल करीब 50 क्विंटल खाद बेची गई है। इससे गांव को करीब 40 हजार रुपये की आय हुई है।
हम लोग पारंपरिक खाद के स्थान पर वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते हैं तो फसल बेहतर होती है। दो से ढाई क्विंटल तक उत्पादन में फर्क पड़ा है। खेत की मिट्टी भी बेहतर हुई है। - अरुणेश, किसान
यह खाद बेहतर परिणाम देती है। इसके प्रयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। सभी खेत में तो नहीं, लेकिन दो से तीन बीघे में हम वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते हैं। - दिनेश पांडेय, किसान
वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग खब्जियों के लिए बेहतर है। गमलों में इसे प्रयोग किया जाए तो पौधे अच्छे होते हैं। फसल भी इसके प्रयोग से बेहतर और गुणवत्ता वाली होती है। नर्सरी और अन्य कार्य में खाद अच्छे परिणाम दे रही है। -डॉ. मनोज कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक
टेवां गांव में वर्मी कंपोस्ट यूनिट में तैयार हो रही खाद। स्रोत- ग्रामीण
टेवां गांव में वर्मी कंपोस्ट यूनिट में तैयार हो रही खाद। स्रोत- ग्रामीण