रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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एनजीटी की रोक के बावजूद सरायअकिल के नंदा का पुरवा में नदी की धारा के अंदर से बालू निकासी की जा रही है। रोजाना बोट के जरिए निकाली जा रही लाखों की बालू का डंप व बिक्री होने के बावजूद विभागीय अफसर बेखबर हैं। नतीजन बालू कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
नंदा का पुरवा बालू घाट का पट्टा प्रयागराज निवासी एक व्यक्ति के नाम है। नियमानुसार निर्धारित खंड पर सूखे से बालू खनन करने का प्राविधान है। मगर पट्टाधारक व अन्य स्थानीय पार्टनर द्वारा प्रतिदिन भारी मात्रा में यमुना नदी के अंदर से बालू निकाल कर बेची जा रही है। इतना ही नहीं रोजाना नाव के जरिए यमुना नदी से लाखों की बालू निकाल कर डंप भी की जा रही है। इसके एनजीटी के कड़ेे नियमों के बावजूद ठेकेदार बेखौफ होकर नदी की धारा से बालू निकाल कर बेच रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ ही सरकारी खजाने को चपत लग रही है। नाव द्वारा नदी से निकाली जा रही बालू चित्रकूट जिले में आती है। कुछ माह पहले इसी बात को लेकर घाट में तनाव की स्थिति पैदा हुई थी। जिसके बाद फायरिंग होने की बात भी सामने आई थी। पूर्व में पट्टाधारक ने नाविकों पर जबरन नदी से बालू निकाल कर डंप करने का आरोप भी लगाया था।
विभागीय सूत्रों की मानें तो पट्टाधारक खनन विभाग में बालू निकासी की रॉयल्टी भी नहीं जमा कर रहा है। जिसके लिए विभाग द्वारा पट्टाधारक को नोटिस भी जारी की गई है। अगर पट्टाधारक द्वारा रॉयल्टी जमा नहीं किया जाता है तो अगले 15 दिनों में जिला प्रशासन द्वारा पट्टा निरस्त कर घाट बंद कर दिया जाएगा। इस बाबत खान निरीक्षक का कहना है कि पिछले दिनों छापेमारी की गई थी। कुछ नाविकों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जा चुकी है। यदि ऐसा है तो दोबारा औचक निरीक्षण कर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।