अफसरों की अनदेखी की भारी कीमत जिले के किसानों को चुकानी पड़ सकती है। हजारों किसानों को वर्ष 2015 में आए चक्रवाती तूफान से हुए नुकसान का मुआवजा वितरित होना था। इसके लिए शासन ने अक्टूबर 2016 में करीब 33.97 करोड़ रुपये भेजे थे। मुआवजे की यह रकम अभी तक किसानों में नहीं बंट सकी है। वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना चल रहा है। यदि यह रकम न वितरित हुई तो शासन को इसे वापस करना पड़ सकता है। इसका खतरा बढ़ गया है। समीक्षा बैठक में इसका पता चला तो एडीएम ने नाराजगी जाहिर की। तीनों तहसीलों के तहसीलदारों को आदेश दिया कि वे जल्द से जल्द रकम को वितरित करें।
वर्ष 2015 में आए चक्रवाती तूफान से जिले के किसानों को भारी नुकसान पहुंचा था। फसलें बर्बाद हो गई थीं। किसान कर्ज में डूब गए थे। सरकार ने किसानों को मुआवजा देने का वादा किया था। अक्टूबर 2016 में किसानों को मुआवजा देने के लिए 33.97 लाख का बजट दिया गया। बजट आने के बाद मुआवजे की रकम को ई-पेमेंट के जरिए संबंधित किसानों के खाते में भेजना था। चार माह के भीतर तहसील प्रशासन ने अब तक केवल चार करोड़ 55 लाख की ही रकम किसानों में वितरित की। बाकी रकम खाते में ही डंप है। वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना चल रहा है। अपर जिलाधिकारी राकेश श्रीवास्तव ने समीक्षा की तो किसानों के साथ हुए खिलवाड़ का पता लगा। उन्होंने इस पर तहसीलदारों से नाराजगी जाहिर की। अपर जिलाधिकारी ने सिराथू, मंझनपुर और चायल तहसीलदार को आदेश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द रकम को किसानों के खाते में भेजें। यदि ऐसा न हुआ तो मुआवजे की रकम शासन को वापस करनी पड़ेगी। ऐसा हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।वहीं तहसील प्रशासन की लापरवाही किसानों को बहुत महंगी पड़ सकती है। यदि कृषि निवेश अनुदान की रकम वापस होती है तो यह किसानों के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। वर्ष 2015 में किसानों की लागत तक डूब गई थी। केसीसी धारक किसान कर्जदार हो गए थे। ऐसी स्थिति में इस मुआवजे की उन्हें बहुत जरूरत है, कर्ज से मुक्त होने के लिए।