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धान की फसल पर कंडो रोग का हमला

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Condo disease attack on paddy crop - फोटो : KAUSHAMBI
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धान की फसल पर कंडो कीट का प्रकोप शुरू हो गया। कीट के हमले से की फसल समय से पहले ही पीली पड़ने लगी है। इसके चलते तकरीबन 25 फीसदी उत्पादन में गिरावट का आशंका है। किसान कृषि विभाग का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन, उन्हें उपचार के नाम पर दवा की पर्ची पकड़ाई जा रही है। ऐसे में किसान बाजार से महंगे दाम पर कीटनाशक खरीदने को मजबूर हैं। इसके अलावा मक्खियों का भी प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस बार 46 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई बरसात के कारण कटाई पिछड़ गई है। बारिश के बाद अब फसलों पर कंडो कीट के साथ मक्खियों का हमला बढ़ गया है। सिराथू विकास खंड के निजामपुर नौगीरा निवासी किसान मंगरू, मुखिया यादव, हरिश्चंद्र आदि का कहना है कि बेवक्त हुई बरसात के कारण फसल काटने में देरी हुई।
इसके चलते लहलहाती फसल पर कंडो कीट ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। कीट के अलावा मक्खियां भी फसल को चट कर रहीं हैं। रोग के कारण धान की बालियां वक्त से पहले पीली पड़ने लगी हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि रक्षा इकाई पहुंचने पर ज्यादातर ताला लगा मिलता है। यदि कोई मिला तो दवा की पर्ची लिखकर पकड़ा दी जाती है। मजबूरी में किसानों को महंगा कीटनाशक खेतों में डालना पड़ रहा है।
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बंद रहती है कृषि रक्षा इकाई
मंझनपुर। किसानों को कीटनाशक या अन्य दवाएं उपलब्ध कराने के लिए ब्लाक मुख्यालयों पर कृषि रक्षा इकाई है। यहां से किसानों को फसलों की रक्षा के लिए लिए दवा आदि मुहैया कराए जाने की व्यवस्था है। लेकिन, अफसरों की अनदेखी के कारण ज्यादातर स्टोर बंद रहते हैं। नतीजतन लोगों को बाहर की दुकानों से कीटनाशक खरीदना पड़ रहा है।
धान की फसल में कंडो रोग की जानकारी मिलती है। इसके लिए सभी जिम्मेदारों को निर्देश दिया गया है कि वह किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उसका त्वरित निस्तारण कराएं। कृषि रक्षा इकाई से किसानों को उचित सलाह व दवा वितरण करने का भी निर्देश दिया गया है।
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मनोज कुमार गौतम-जिला कृषि अधिकारी
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