गर्मी के दिनों में आमतौर पर लोगों को लौकी पसंद होती है। बाजार में इसकी खासी मांग होती है। ऐसे में किसानों को जहां कीमत अच्छी मिलती है वहीं बाजार की चिंता नहीं रहती। करीब दो से ढाई माह की यह फसल लागत से 20 गुना तक मुनाफा देती है।
लौकी आम तौर पर पूरे साल बाजार में मिलती है। गर्मी के दिनों में लौकी की मांग अधिक होती है। बीज रोपाई के 50- 55 दिनों में लौकी में फल आने लगते हैं। मंझनपुर कस्बे से सटे खोजवापुर, अंबावा पश्चिम, देवखरपुर, इचौली आदि गांव के किसान लौकी की फसल उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं।
लौकी की पौध रोपाई मार्च के अंतिम सप्ताह तक की जा सकती है। खोजवापुर के किसान सर्वेश पटेल ने बताया कि एक बीघा लौकी की फसल तैयार करने में चार से पांच हजार की लागत आती है। यदि फसल अच्छी हुई तो एक लाख तक की आमदनी हो सकती है।
अंबावा पश्चिम के किसान सत्यप्रकाश, राजेश कुमार व मनोज ने बताया कि लौकी की फसल के लिए जरूरी है कि समय से पानी व रखवाली की जाए। मवेशियों से फसल की सुरक्षा करना चुनौती होता है।
मचान विधि से होती है खेती
लौकी की खेती मचान विधि से होती है। ऐसे में लौकी में फल लगते ही वह लटकने लगता है। इससे लौकी में तेजी से वृद्धि होती है। फसल तैयार करने के बाद बाजार की चिंता नहीं होती। किसान के खेत से ही कारोबारी लौकी खरीद ले जाते हैं। गर्मी के लौकी गिनती से बिकती है। एक लौकी की कीमत 15-20 रुपये तक पहुंच जाती है।
जिले में करीब 520 बीघे में लौकी की फसल तैयार करने का अनुमान है। गंगा व यमुना के किनारे वाले गांव को साथ ही नगर पंचायतों के आसपास के गांव के किसान फल में अधिक रुचि ले रहे हैं। विभाग किसानों को बीज के साथ ही फसल तैयार करने की जानकारी देता है। - प्रमोद कुमार सिंह, उद्यान निरीक्षक