बारिश के दौरान दोआबा की ग्राम सभाएं गंदगी से कराह रही हैं। गंदगी के चलते ग्रामीणों में संक्रामक बीमारी फैल रही है। गांवों में तैनात सफाई कर्मी हैं कि वह झाड़ू लगाने के लिए गांव कभी आते ही नहीं हैं। इसके बावजूद भी विभाग से उनके वेतन का भुगतान आसानी से हो रहा है। माना जा रहा है कि ग्राम सभा से लेकर महकमे के उच्चाधिकारियों तक सेटिंग होने के चलते सफाईकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
दोआबा में कुल 498 ग्राम सभाएं हैं। इन ग्राम सभाओं में लगभग एक हजार सफाई कर्मियों की तैनाती है। इनमें से लगभग 50 सफाई कर्मचारी पहुंच के चलते विभिन्न विभागों में तैनात हैं। बचे हुए कर्मचारियों में 80 फीसदी तैनाती वाले गांवों में सफाई करने के लिए नहीं जाते। इसके चलते 20 फीसदी ग्राम सभाओं को छोड़ बाकी के गांव और उनके मजरे गंदगी से बजबजा रहे हैं। गांवों की गलियों और नालियों की सफाई नहीं होने से बारिश के दिनों में गांव बजबजा उठे हैं। बानगी के तौर पर विकास खंड कौशाम्बी के म्योहर गांव को लिया जा सकता है। यहां पर तीन सफाई कर्मचारियों की तैनाती है लेकिन यह कभी भी गांव सफाई करने नहीं पहुंचते।
गांव के बब्लू मिश्र, अनिल तिवारी, शिवपूजन आदि का आरोप है कि सफाई न होने से गलियों के साथ-साथ नालियों का बुरा हाल है। सफाई न होने से लोग संक्रामक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां गंदगी के चलते बीमारी फैल चुकी है। इसमें मूरतगंज ब्लॉक का भीटी, महगांव और नेवादा ब्लॉक के नंदा का पुरवा, कड़ा ब्लॉक का शहजादपुर गांव शामिल है। इन गांवों के दर्जनों लोग डायरिया, वायरल फीवर की चपेट में आ चुके हैं। बीमारी को देखते हुए डीपीआरओ ने भीटी गांव के सफाई कर्मी को निलंबित भी कर दिया है। इसके बावजूद लापरवाह हो चुके सफाई कर्मियों में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा।
गंदगी से गांवों में फैल रही संक्रामक बीमारियां
गांवों में गंदगी के चलते जगह-जगह संक्रामक बीमारी फैल रही है। लोग वायरल फीवर, डायरिया, कॉलरा आदि रोगों का शिकार हो रहे हैं। इसका अंदाजा संबंधित गांव की पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में आ रहे संक्रामक रोगों के मरीजों से लगाया जा सकता है।
ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि आखिर गांवों में तैनात सफाई कर्मी महीने में एक दिन भी गांव की सफाई करने क्यों नहीं जाते। बानगी के तौर पर नेवादा ब्लॉक के बिगहरा गांव को लिया जा सकता है। इस गांव के मजरा टिकरा में तैनाती के बाद से आज तक कोई भी सफाई कर्मी नहीं पहुंच सका है। गांव के मदन मोहन उपाध्याय की मानें तो सफाई होना तो दूर कर्मचारी कौन है इसका तक अता-पता नहीं है।
हाजिरी लगाकर गांवों से नदारद रहते हैं सफाईकर्मी
गांवों में तैनात सफाई कर्मी सप्ताह में एक-दो दिन हाजिरी लगाने के लिए गांव जाते हैं। इस दिन वह ग्राम प्रधान के यहां रखे उपस्थित रजिस्टर में पूरे सप्ताह भर की हाजिरी चढ़ा देते हैं। ग्राम प्रधान से सेटिंग होने के चलते वह कब आते हैं और कब जाते हैं इसकी कोई निगहबानी नहीं होती। सूत्रों की मानें तो सफाई कर्मी इस सुविधा के बदले ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक में पटल देख रहे लिपिक तक को सुविधा शुल्क मुहैया कराते हैं।
गांवों में सफाई व्यवस्था का जायजा समय-समय पर लिया जाता है। निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने पर संबंधित सफाई कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। किसी गांव से शिकायत मिली तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
केके मिश्र, प्रभारी डीपीआरओ