ग्राम सभाओं को खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान कारगर साबित हो रहा है। ऐसा स्वच्छता मिशन की ऑनलाइन रिपोर्ट बता रही है। अब तक 127 ग्राम सभाएं खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हो चुकी हैं। इन गांवों में ओडीएफ का पैमाना पूरा हो रहा है या नहीं इस बावत तो कुछ कहना कठिन है पर असलियत क्या है अफसर गांव पहुंचकर खुद देख सकते हैं।
भारत सरकार द्वारा जिले की ग्राम सभाओं को अभियान चलाकर ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाए जाने का फरमान जारी किया था। इसके अंतर्गत ग्रामसभाओं में शत प्रतिशत शौचालय निर्माण कराते हुए ग्रामसभा को गंदगी से मुक्त किया जाना था। शासन के फरमान पर अफसरों ने सीएलटीएस टीम लगाकर गांवों में अभियान चलवाया। जिलास्तरीय अधिकारी गांवों में रात्रि निवास कर लोगों को खुले में शौच न जाने का संदेश देते रहे। अफसरों और सीएलटीएस टीम की मेहनत का नतीजा रहा कि कुछ लोगों के मन मस्तिष्क में यह बातें घर कर गई। शासन से लाभ मिलने या न मिलने के बावजूद लोगों ने शौचालयों का निर्माण कराया और खुले में शौच जाना बंद किया।
इसके बाद टीम दूसरे गांवों में पहुंच गई। ग्राम सभाओं से टीम के हटते ही 60 फीसदी लोगों के हाथों में फिर से लोटा आ गया। लोगों ने शौचालय तो बनवा लिया पर उन्हें बाहर शौच जाए बगैर चैन ही नहीं मिल रहा है। उधर विभागीय जिम्मेदारों ने शासन की वेबसाइट पर 127 ग्राम सभाओं को ओडीएफ करार देते हुए रिपोर्ट भेज दी। ऐसे में सवाल यह उठने लगा कि जब लोगों के हाथ से लोटा नहीं छूट रहा तो गांव ओडीएफ की श्रेणी में कैसे पहुंचा। इसकी बानगी वेबसाइट में फीड किसी भी ओडीएफ गांव से जिला स्तरीय अधिकारी ले सकते हैं। ऐसे में ओडीएफ की हकीकत क्या है सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
ओडीएफ हो चुकी 127 ग्राम सभाओं की वेबसाइट पर फीडिंग हो चुकी है। कुछ और ग्राम सभाएं हैं जिनकी फीडिंग कराई जानी है। ग्राम सभा के ओडीएफ होने का मानक खुले में गंदगी का न दिखना रखा गया है। जहां मानक पूरा नहीं हो रहा, वहां फिर अभियान चलवाया जाएगा।
संजीव यादव, जिला परियोजना समन्वयक