जिन हाथों में खिलौने और कापी कलम होनी चाहिए। उन हाथों में फावड़ा और डलिया रहती है। ये नजारा है सरसवां ब्लॉक अंतर्गत अंधावां ग्राम सभा का। जहां दो जून की रोटी की खातिर बच्चियां मजदूर बन गईं। गरीब परिवार की ये बच्चियां तालाब की खोदाई कर रही हैं। ऐेसे में खुलेआम मनरेगा एक्ट और बाल श्रम कानून की धज्जियां उड़ाईं जा रही हैं। तालाब खोदाई का निरीक्षण करने गए डीसी मनरेगा और बीडीओ की नजर काम कर रही बच्चियों पर पड़ी तो वह दंग रह गए। मामले में सेक्रेटरी, रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर की तैयारी की जा रही है।
जिले में जॉब कार्ड धारकों को रोजगार दिलाने वाला मनरेगा एक्ट बाल श्रम कानून के उल्लंघन का जरिया बनता जा रहा है। जिले की 498 ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों में नाबालिगों से बेखौफ काम लिया जा रहा है जो मनरेगा एक्ट का भी खुला उल्लंघन है। सौ दिन का रोजगार देने के नाम पर मनरेगा एक्ट और बाल श्रम कानून के हो रहे खुले उल्लंघन के प्रति आज तक किसी की नजर नहीं गई लेकिन बृहस्पतिवार को जब डीसी मनरेगा रविशंकर राय और बीडीओ सरसवां अखिलेश त्रिपाठी ने यह नजारा देखा तो वह दंग रह गए। बताते चलें कि सरसवां ब्लॉक अंतर्गत अंधावां ग्राम सभा में मनरेगा से तालाब की खोदाई कराई जा रही है। तालाब की खोदाई में लगभग सौ मजदूर काम कर रहे हैं।
इनमें नौ बच्चियों भी फावड़ा और तसला लेकर तालाब की खोदाई करती पाई गईं। अफसरों ने इन बच्चियों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह तालाब की खोदाई में लगातार काम कर रही हैं और उन्हें मजदूरी भी मिल रही है। बच्चियों से मनरेगा में काम कराकर मनरेगा एक्ट और बालश्रम कानून के उल्लंघन को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। मामले में सेक्रेटरी संजय सिंह, ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
अंधावां तालाब की खोदाई में नौ नाबालिग बच्चियां काम करते मिली। अवयस्क बच्चियों से काम लेना मनरेगा एक्ट और बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन है। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा कर सेक्रेटरी समेत संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
अखिलेश तिवारी, बीडीओ सरसवां