फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chaitra Navratri : चैत्र नवरात्र आज से शुरू, तीन शुभ योगों में होंगी मां की आराधना

Wed, 18 Mar 2026 07:09 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी

सार

चैत्र नवरात्र की शुरुआत आज बृहस्पतिवार से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा आरंभ होगी। नवरात्र के नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
विज्ञापन
शक्तिपीठ मां कड़ा धाम शीतला माता मंदिर कौशाम्बी। - फोटो : संवाद।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चैत्र नवरात्र की शुरुआत आज बृहस्पतिवार से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा आरंभ होगी। नवरात्र के नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत तीन विशेष शुभ योग में योग में हो रही है।

हिंदू धर्म में साल में चार नवरात्र होती है। चैत्र नवरात्र आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होता है। मान्यता है कि, नवरात्र के इन दिनों में मां दुर्गा अपनी विशेष कृपा भक्तों पर बरसाती हैं और साधक के दुखों का निवारण कर सुख-सौभाग्य को बढ़ाती हैं।

विज्ञापन


हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत तीन विशेष शुभ योग शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में हो रही है। शुक्ल योग में पूजा-पाठ, व्रत, जप और धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य मिलता है। नए कार्यों की शुरुआत करने से सफलता और उन्नति मिलने की संभावना बढ़ती है। ब्रह्म योग में अध्ययन, मंत्र साधना, ध्यान और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन विशेष फलदायी होता है।

विज्ञापन

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्र के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। वहीं 26 मार्च को अष्टमी व 27 नवमी को कन्या पूजन किया जाएगा।

ऐसे करें देवी मां की पूजा की तैयारी

करारी। नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें। देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं। इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।

एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं। इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियल चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें। इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं। देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे को पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।

व्रत का पारण कब होगा

पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि 27 मार्च को दोपहर 12:02 तक नवमी तिथि रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। लिहाजा 27 मार्च को दोपहर 12:02 के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें