विधान सभा चुनाव के ऐन वक्त पर लाखों की लागत से खरीदे गए 440 कैमरों में 158 दगा दे गए। इन कैमरों में ऐसी गड़बड़ी आई कि दुकानदार भी जवाब दे गया। ऐसे में अब पंचायती राज विभाग द्वारा प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए 472 नए कैमरों का इंतजाम करना पड़ रहा है। खराब हुए कैमरे यदि सुरक्षित होते तो प्रशासनिक मद का लाखों रुपये पानी की तरह बहने से बच जाता।
लोकसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए ग्राम सभाओं में तीन साल पहले छह हजार की दर से 440 ग्राम सभाओं में 26 लाख 40 हजार की लागत से कैमरे की खरीदारी की गई थी। चुनाव बाद इन कैमरों से कुछ दिनों तक शौचालयों के फोटोग्राफ्स कराए गए। इसके बाद इन्हें ग्राम सभाओं के सुपुर्दगी में रखा गया। देखरेख के अभाव में 440 कैमरों में 158 पूरी तरह से नष्ट हो गए। लगभग दस लाख के कैमरों में ऐसी खराबी आई कि दुकानदार ने ठीक करने से इनकार कर दिया।
चुनाव के ऐन वक्त पर कैमरों के दगा देने से जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में महकमे के जिम्मेदारों ने प्रत्येक 14वें वित्त के प्रशासनिक मद से 472 नए कैमरे खरीदने की तैयारी कर ली है। जल्द ही जिले के 732 मतदान केंद्रों के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा एक-एक कैमरे का बंदोबस्त करते हुए कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। बहरहाल कुछ भी हो खरीदे गए कैमरों की देखभाल ठीक से की जाती तो चुनाव के ऐन वक्त पर 14वें वित्त के प्रशासनिक मद का पैसा कैमरा खरीद के नाम पर खर्च होने से बच जाता।