यूनो गांव में मंगलवार को किसान ने बगीचे में तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक के भाई ने बताया कि वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। इलाज का खर्च भारी था, कर्जदार हो गए थे। इन दोनों वजहों से परेशान रहते थे।
बड़े भाई बबलू सिंह उर्फ दिनेश सिंह बताया कि महेंद्र प्रताप सिंह (40) सुबह घर पर सामान्य रूप से खाना खाने के बाद दोपहर करीब 12 बजे घर से खेत की ओर पैदल निकल गए थे। कुछ देर बाद जब वह वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। उनका मोबाइल घर पर ही मिला, जिससे चिंता और बढ़ गई।
बबलू सिंह ने बताया कि छोटा बेटा छोटू और अन्य परिजन खोजबीन करते हुए घर से करीब 800 मीटर दूर खेत के पास स्थित बगीचे में पहुंचे, जहां महेंद्र प्रताप सिंह खून से लथपथ जमीन पर पड़े मिले। पास ही तमंचा पड़ा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
महेंद्र का बड़ा बेटा राज प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है, जबकि बेटी झांसी में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही है। छोटा बेटा घर पर रहकर खेती-किसानी में मदद करता था। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। पत्नी प्रतिमा सिंह बेसुध हो गईं।
इलाज के लिए बेची थी तीन बीघे जमीन
भाई ने बताया महेंद्र खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन इलाज में करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च हो गए। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें अपनी तीन बीघे जमीन बेचनी पड़ी। कर्ज भी ले रखा था।
दोबारा उभर आया था कैंसर
बड़े भाई बबलू सिंह ने बताया कि महेंद्र करीब दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। लखनऊ स्थित मैक्स अस्पताल में उनका कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक राहत मिली। एक सप्ताह पहले जांच के दौरान फिर से कैंसर उभरने की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन की सलाह दी थी, जिससे वह पूरी तरह टूट गए थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे और इलाज में भारी खर्च और कर्ज के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
- शिवांक सिंह, सीओ सदर