मंझनपुर। लोहंदा कांड में पूरे घटनाक्रम के बीच फरार आरोपी प्रधान भूप नारायण पाल कितने दिन गांव में ठहरा, किससे और कब बातचीत की। घटना की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच प्रकोष्ठ) के हाथ ऐसे कई अहम साक्ष्य लगे हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) व अन्य वैज्ञानिक तरीके से किए गए साक्ष्य संकलन में यह भी पता चला है कि आरोपी दो जून तक गांव में ही मौजूद था।
लोहंदा गांव में 27 मई को आठ वर्षीय बालिका मृतक रामबाबू तिवारी के भाई के यहां आयोजित रामायण में गई थी। रास्ते में रामबाबू के बेटे सिद्धार्थ ने कारखाना में ईंट फेंकते समय बालिका को पकड़ लिया। सिद्धार्थ के खिलाफ बालिका की मां ने दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया था। बेटे पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाते हुए रामबाबू ने पुलिस चौकी में जहर खा लिया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई थी।
विरोध में रामबाबू के परिजन व ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। मामले ने तूल पकड़ा तो सियासत गरमा गई। एसपी राजेश कुमार ने एसआईटी गठित की। टीम में शामिल कड़ाधाम थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह सहित तीन पुलिस कर्मियों ने जांच करना शुरू किया तो पता चला कि दुष्कर्म का आरोप गलत है।
एसआईटी ने गांव पहुंचकर बालिका सहित उसके साथ घटना वाले दिन रहे बच्चों के बयान दर्ज किए थे। बुधवार को भी टीम ने दोनों पक्ष से कई लोगों से जानकारी हासिल की।
इसबीच प्रधान की गांव में मौजूदगी को लेकर वीडियो भी हाथ लगा, जिसमें पीड़िता की मां बोल रही है कि प्रधान से बात करने के बाद कार्रवाई के लिए पति थाने गए थे। यही नहीं, पुलिस ने प्रधान सहित कई लोगों के कॉल डिटेल को भी खंगाला। तमाम लोगों से पूछताछ में यह भी पता चला है कि दो जून की दोपहर बाद तक प्रधान गांव में ही मौजूद था।
इसके बाद वह पानीपत के लिए निकला है। एसपी राजेश कुमार ने बताया कि प्रधान गांव में कब मौजूद था, किससे बात हुई, क्या भूमिका रही, सभी के साक्ष्य संकलित किए जा रहे हैं।