मंझनपुर/सिराथू/करारी (कौशाम्बी)। अलविदा अलविदा मेरे इमाम अलविदा...शाहे इमाम अलविदा...इन्हीं मातमी बोलों के बीच शनिवार को कर्बला में अकीदत के फूल दफन कर दिए गए। इससे पहले मुहर्रम की दसवीं पर जिले के विभिन्न कस्बों के इमाम बारगाह से ताजिया उठाए गए। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने रास्तेभर नौहाखानी, सीनाजनी और जंजीरी मातम किया।
दस मुहर्रम की सुबह होते ही अजाखानों से हाय हुसैन, हाय हुसैन की सदाओं ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। सजे अजाखाने वीरान हो गए। अलविदा अलविदा या हुसैन अलविदा की सदाएं दिनभर सुनाई देती रहीं। पूरे दिन अजादारों ने इमाम चौक और इमाम बारगाह में ताजिए रखकर अपने गम का इजहार किया। दोपहर दो बजे मंझनपुर, करारी आदि अन्य कस्बों से ताजिए उठने शुरू हुए। ताजिया लेकर जुलूस की शक्ल में कर्बला की ओर निकले अजादार इस दौरान रास्तेभर नौहाखानी, सीनाजनी और जंजीरी मातम करते रहे। करारी में इमाम चौक से पहला ताजिया उठा। इसके बाद हुसैनिया शरीफाबाद, अंसारगंज आदि से ताजिए उठाए गए। ताजिया लेकर निकले जुलूस में शामिल अजादार मातम करते हुए कर्बला की तरफ चले।
जहां जावेद रिजवी, रौशन करारवी, फुरकान रिजवी आदि ने मर्सिया पढ़ा। रौशन करारवी ने पढ़ा...शह बोले सकीना से बीबी न बुका करना, हम जाते हैं मरने को तुम सदमा न सिवा करना...। इसी तरह सिराथू के दारानगर स्थित मरहूम जग्गन मियां, मरहूम लाल मियां और कासिम हुसैन, चौक से डॉ हासिम, मरहूम हबीब साहब, डॉ एजाज हुसैन आदि के इमाम बारगाह से अलम व ताबूत बरामद हुआ। इमाम बारगाह से ताजिया लेकर जुलुस कर्बला पहुंचा। जहां अकीदत के फूल दफन किए गए। सादीपुर और कटरा से ताजिया लेकर या अली, या हुसैन करते हुए जुलूस कर्बला पहुंचा। रास्ते में बाकर अली ने नौहा पढ़ा और अकीदतमंदों ने जंजीर का मातम किया। इसी तरह से भरवारी, मूरतगंज, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, पुरखास, मनौरी, कडा, अलीपुर जीता, दरियापुर जीता आदि स्थानों पर भी जुलूस निकालकर लोगों ने इमाम की याद ने आंसू बहाए।