दीपावली पर आतिशबाजी को लेकर बच्चे और बड़े सभी उत्साहित हैं। पटाखा बाजार लगने के बाद इसकी खरीदारी भी शुरू हो गई है। रोशनी के त्योहार पर पटाखा जलाने के दौरान सावधानी बरतनी भी जरूरी है।
त्योहार को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। अस्पतालों की इमरजेंसी को अलर्ट मोड पर रखते हुए सभी सीएचसी में बेड रिजर्व है। सीएचसी करारी के अधीक्षक डॉ. बद्री बिशाल ने बताया कि दीपावली में पटाखों का धुआं दमा और दिल के मरीजों के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है। साथ ही 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और आठ वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
फेफड़े की नलियां सिकुड़ने से अस्थमा से पीड़ित लोगों की सांस फूल सकती है। इस दौरान नाक बंद होना, घबराहट, खांसी, हृदय व फेफड़े संबंधी दिक्कतें, आंखों में जलन, दमा का दौरा, रक्त चाप, गले में संक्रमण, एलर्जी व निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एके सिंह ने हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज से हृदय गति और रक्तचाप में अचानक वृद्धि हो सकती है। तेज आवाज के पटाखे दिल की बीमारी वाले लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
चश्मा पहनकर करें आतिशबाजी, आंखें बचाएं
दीपावली पर असावधानी बरतने से आंखों की देखने की शक्ति को नुकसान हो सकता है। बेहतर होगा कि चश्मा पहनकर आतिशबाजी करें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत यादव बताते हैं कि असावधानी से की गई आतिशबाजी से रेटिना और कार्निया को नुकसान हो जाता है जिससे आंखों की रोशनी भी चली जाती है।
वह बताते हैं कि जब पटाखा बम फटता है तो बारूद के कण प्रेशर के साथ निकलते हैं। जब ये कणों से पुतली पर लगते हैं तो कई बार आंखों की रोशनी को नुकसान हो जाता है। लोग बच्चों को फुलझड़ी चलाने के लिए हाथ में पकड़ा देते हैं, जो कोमल आंखों के लिए बहुत घातक हो सकता है।
पटाखा छुड़ाते समय ये सावधानी बरतें
- आतिशबाजी के समय चश्मा जरूर पहनें
- पटाखा फोड़ते समय आंखों को बंद कर लें
- जलन होने पर आंख में ठंडे पानी के छींटे डालें
- सूती ढीले कपड़े पहने और नजदीक में पानी रखें
- आंखों में जलन होने पर डॉक्टर को दिखाएं
- आतिशबाजी के धुएं से दूर रहें