कौशाम्बी में सपा और बसपा की लय-ताल चर्चा का विषय बन गई है। माना जा रहा है कि सपा, बसपा महासचिव की सीट पर प्रत्याशी बदलकर संबंध प्रगाढ़ करने की फिराक में है। ताकि आने वाले विधान सभा चुनाव में उलटफेर की स्थिति में पार्टी के शीर्ष नेताओं को किसी प्रकार के नुकसान का सामना न करना पड़े। सदर सीट पर इलाहाबाद से बुलाकर उतारे गए सपा प्रत्याशी को कुछ इसी नजरिए से जोड़कर देखा जा रहा है।
विधान सभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के धुरंधरों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। सत्ता परिवर्तन होने पर उन्हें राजनीतिक उठा पटक का दंश न भुगतना पड़े इसे लेकर शीर्ष स्तरीय नेता पार्टी कद्दावरों की सीट पर कमजोर प्रत्याशी उतारकर संबंध प्रगाढ़ करने में जुट गए हैं। यह चर्चा कौशाम्बी में जोरों पर चल पड़ी है। जिले की चर्चित सदर सीट पर बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज ने आज तक हार का मुंह नहीं देखा लेकिन वर्ष 2002 में स्थानीय उम्मीदवार शिवमोहन चौधरी को सपा ने मैदान में उतारा। शिवमोहन चुनाव लड़े तो इंद्रजीत सरोज को सीट बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। यह चुनाव बसपा महासचिव महज ढाई हजार वोट से जीत सके।
वर्ष 2007 के चुनाव में सपा ने उम्मीदवार बदला तो महासचिव की जीत का अंतर 27 हजार से अधिक हो गया। इसके बाद वर्ष 2012 के विस चुनाव में पार्टी ने पुन: शिवमोहन पर कार्ड खेला। इस बार सपा का वोट तो बढ़ा पर हार का अंतर तीन हजार छह सौ का हो गया। इसके बाद भी 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने शिवमोहन को दरकिनार कर दिया। इस सीट के लिए इलाहाबाद के छात्र नेता हेमंत टुन्नू को प्रत्याशी बनाकर उतारा गया है। बाहर के प्रत्याशी को बसपा महासचिव के खिलाफ मैदान में उतारे जाने को लेकर चर्चाओं का दौर चल पड़ा है। माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी शीर्ष नेताओं को किसी प्रकार की फजीहत न उठानी पड़े इसके चलते बसपा महासचिव की सीट पर कमजोर प्रत्याशी उतारकर संबंध प्रगाढ़ करने की कोशिश की जा रही है। बहरहाल कुछ भी हो सदर सीट पर सपा के घोषित उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।
कौशाम्बी में जिस तरह समाजवादी पार्टी ने सूबे के कबीना मंत्री रहे इंद्रजीत सरोज के सामने बाहर का प्रत्याशी उतारा है, वही चाल बसपा के कद्दावरों ने भी चल रखी है। पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ की कुंडा सीट पर रघुराज प्रताप सिंह के मुकाबले में बसपा ने पार्टी कार्यकर्ता परवेज अख्तर को मैदान में उतार रखा है। जबकि बसपा और राजा भैया के संबंधों की कहानी किसी से छिपी नहीं है। कुछ भी हो कौशाम्बी में मंझनपुर से सपा और प्रतापगढ़ की कुंडा सीट पर उतारे गए बसपा प्रत्याशी पार्टी शीर्ष नेताओं के संबंध प्रगाढ़ता की ओर इशारा कर रहे हैं।
पार्टी ने दो बार मुझ पर विश्वास जताया। मैंने पूरे मनोयोग से चुनाव लड़ा। दोनाें बार कम वोटों से शिकस्त खानी पड़ी है। इस बार भी मैं चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। पार्टी मुखिया ने जो निर्णय लिया है। वह सर्वमान्य है। उस पर टिप्पणी जायज नहीं है।
शिवमोहन चौधरी, पूर्व प्रत्याशी सपा