क्षेत्र र्में इंट-भट्ठों का संचालन मनमाने तरीके से नियमों को ताक पर रख कर किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को नजर अंदाज कर पर्यावरण एवं प्रदूषण विभाग से एनओसी हासिल नहीं होने के बावजूद जुगाड़ से ईंट भट्ठे का कारोबार संचालित हो रहा है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मनमाने तरीके से संचालित ईंट-भट्ठों के जरिए प्रदूषण एवं पर्यावरण को नुकसान होने पर कड़ा रुख अख्तियार किया र्है। इंट भट्ठो के संचालन के लिए नई गाइड लाइन के साथ पर्यावरण एवं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फरमान के बाद एसडीएम सिराथू ने क्षेत्र के 42 भठ्ठा संचालकों के नाम नोटिस जारी कर एनओसी कार्यालय में आकर जमा करने को कहा था।
नोटिस में यह भी निर्देश दिया गया था कि जिनके पास एनओसी नहीं है। वे तत्काल प्रभाव से भठ्ठे का संचालन बंद कर दें। अन्यथा अवैध तरीके से भट्ठे का संचालन किए जाने पर कार्रवाई की बात कही गई थी। राजस्व विभाग की सख्ती के बाद भट्ठ संचालकोें की नींद हराम हो गई थी। उन्हें अपना करोड़ाें का कारोबार ठप होने का खौफ सताने लगा था। पर, इस कारोबार से जुड़े लोगों ने स्थानीय अधिकारियों पर जाने कौन का जादू कर दिया कि उनका बिगड़ा हुआ खेल फिर से चालू हो गया।
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बिना एनओसी अवैध तरीके से ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है। प्रशासन की मौन सहमति से लबरेज भट्ठा संचालक खुलेआम पर्यावरण एवं प्रदूषण विभाग को ठेंगा दिखाते हुए ईंट पथाई से लेकर पकाई का काम करते हुए देखे जा सकते हैं।
एसडीएम सिराथू विवेक चतुर्वेदी का कहना है कि ईंट भट्ठों के संचालन के संबंध में कोई जानकारी दे पाना संभव नहीं है। क्योंकि यह खनन विभाग का काम है। खनन अफसर ही बता सकते हैं कि किन भट्ठा संचालकों के पास प्रदूषण एवं पर्यावरण विभाग से एनओसी हासिल है। अगर कोई बिना एनओसी भठ्ठा चला रहा है तो यह देखना भी खनन विभाग का काम है, मेरा नहीं।