कौशाम्बी ससंदीय क्षेत्र में आने वाली जिले की तीनों विधानसभाओं पर भाजपा का कब्जा है। इनमें से चायल और सिराथू विधानसभा क्षेत्र में पार्टी और उसके विधायकों का प्रदर्शन दमदार रहा। पर, सदर (मंझनपुर) विधायक लालबहादुर के क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी को सपा गठबंधन उम्मीदवार से करीब दो हजार मतों से शिकस्त खानी पड़ी। इतना ही नहीं सदर विधायक अपने बूथ से भी पार्टी को जीत नहीं दिला सके। इसके अलावा भी विभिन्न दलों के कई दिग्गज अपना बूथ नहीं बचा सके।
कौशाम्बी संसदीय सीट में पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ की कुंडा और बाबागंज के साथ ही जिले की मंझनपुर, सिराथू और चायल विधानसभाएं शामिल हैं। कौशाम्बी जनपद में आने वाली तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। पार्टी और प्रत्याशी को इन विधायकों से दमदार प्रदर्शन की अपेक्षा थी। चुनाव में मिलने वाले वोट विधायकों द्वारा ढाई साल के कार्यकाल में जनता के बीच पकड़ से भी जोड़ के देखा जाना था। लिहाजा यूं कहें कि लोकसभा चुनाव विधायकों के लिए भी किसी परीक्षा से कम नहीं था। गुरुवार को आए नतीजों में सदर विधायक लालबहादुर फेल नजर आए। चुनाव में वह अपनी विधानसभा मंझनपुर से पार्टी प्रत्याशी को जिता पाना तो दूर बल्कि खुद का बूथ ही हार गए। सरसवां विकास खंड के बनी खास
निवासी लालबहादुर बूथ संख्या 375 के वोटर हैं। इस बूथ पर सपा गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज को 473 तथा भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर को 288 मतों से ही संतोष करना पड़ा। यहां से भाजपा 185 वोटों से पिछड़ गई। जबकि समूची विधानसभा की बात करें तो सपा ने भाजपा को 1991 मतों से शिकस्त दी। गनीमत रही चायल और सिराथू विधायकों ने एड़ी-चोटी का जोर लगाकर 30207 मतों की लीड दे दी। वरना नतीजा कुछ और होता। चुनाव में चायल विधायक संजय गुप्ता के क्षेत्र से भाजपा को 95168 तो सपा को सिर्फ 78253 वोट मिले। कमोबेश सिराथू विधायक शीतला प्रसाद के क्षेत्र का भी यही हाल रहा। यहां से भाजपा को 93760 व सपा को 80468 मतों से ही संतोष करना पड़ा था।
जिस बूथ का मै वोटर हूं वह पासी बहुल है। वहां रहने वाले अधिकतर मतदाता सपा गठबंधन प्रत्याशी के रिश्तेदार हैं। बूथ नंबर 375 में उन्हें अपने चुनाव में भी कम वोट मिला था। रहा सवाल पूरी विधानसभा का तो इस चुनाव में 2017 के मुकाबले भाजपा को करीब छह हजार वोट अधिक मिले हैं। इसलिए इसे मैं हार नहीं बल्कि जीत के रूप में देखता हूं।
लालबहादुर-सदर विधायक